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अनूप गुप्ता-खबर-पांच

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बरेली। थोक कपड़ा कारोबारियों के बाद जिला प्रशासन की ओर से कई और कारोबारों को लॉकडाउन में थोक कारोबार की इजाजत मिलने ही वाली थी कि अनुमति के दायरे से बाहर रह गए दूसरे कारोबारियों ने उनकी टांग खींच ली। सोमवार को दिन भर की कवायद के बाद आदेश जारी होने की तैयारी हो रही थी कि जिला प्रशासन पर एक के बाद एक सवाल खड़े होने शुरू हो गए। राजनीति गहराई तो अफसरों ने अपने हाथ खींच लिए और व्यापारी नेताओं को लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार करने की बात कहकर लौटा दिया।
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पिछले हफ्ते थोक कपड़ा कारोबारियों ने डीएम नितीश कुमार के आगे करोड़ों के नुकसान का मुद्दा रखा था जिसके बाद डीएम ने उन्हें तीन दिन के लिए पड़ोस के ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में शामिल जिलों में थोक में अपना माल सप्लाई करने की इजाजत दे दी थी। व्यापारियों के बीच यहीं से गुटबाजी शुरू हो गई। प्रशासन की ओर से 116 व्यापारियों को अनुमति दी गई थी जब 70 और व्यापारी अनुमति मांग रहे थे। प्रशासन से सीधे संपर्क पर भी बात नहीं बनी तो ये व्यापारी राजनीतिक शरण में पहुंच गए। प्रशासन पर राजनीतिक दबाव पड़ा तो इन 70 व्यापारियों को भी एक दिन के लिए थोक कारोबार की अनुमति दे दी गई। दो मिसाल सामने आने के बाद होजरी, इलेक्ट्रिकल्स, लोहा, सीमेंट और फुटवियर का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने भी जिला प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
डीएम के निर्देश पर सोमवार को कलक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन वीके सिंह, एडीएम सिटी महेंद्र कुमार, एसीएम फर्स्ट रोहित यादव के साथ व्यापारी नेता पवन अरोरा और सुदेश अग्रवाल के बीच इस मसले पर लंबी बातचीत चली। आखिरकार यह रोस्टर तय हो गया कि 12 से 17 मई के बीच किस तारीख को कौन सी दुकानें खुलेंगी। आदेश जारी करने की तैयारी चल रही थी लेकिन इसी बीच डीएम ने उस पर यह कहते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया कि रेड जोन में भीड़ को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। 17 मई तक लागू लॉकडाउन खत्म होने में भी अब कुछ ही दिन बचे हैं। लिहाजा तब तक यह छूट नहीं दी जा सकती।
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व्यापारी गुटों की राजनीति में घिरा प्रशासन तो खींचे हाथ
अफसरों ने इसे खुलकर कहा तो नहीं लेकिन सबकुछ तय होने के बावजूद कारोबारियों को अनुमति न देने के पीछे अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों के जिला प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाने की सुगबुगाहट कलक्ट्रेट से लेकर व्यापारी तबके तक चलती रही। सूत्रों के मुताबिक कुछ व्यवसायों को प्रशासन की ओर से अनुमति दिए जाने की जानकारी जब दूसरे गुटों के पदाधिकारियों को लगी तो उन्होंने सवाल उठाने के साथ अफसरों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अफसरों के पास एक के बाद एक लगातार व्यापारी नेताओं के फोन आने शुरू हुए तो आखिरकार रोस्टर को जारी करने से पहले ही निरस्त कर दिया गया। बताते हैं कि दूसरे गुुुटों के व्यापारी नेता इस बात पर भी नाराज थे कि इतने महत्वपूर्ण मसले पर जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में उन्हें क्यों नहीं बुलाया गया।
कागज पर रह गया ये रोस्टर
सुबह 11 से शाम चार बजे तक खुलनी थीं ये दुकानें
12, 14 और 16 मई : रेडिमेड गारमेंट, लोहा, सीमेंट, सेनेटरी, पेंट, मार्बल और हार्डवेयर
13, 15 और 17 मई : सीलिंग फैन, कूलर, साइकिल पार्ट, बिना सिला कपड़ा, फुटवियर, ऑप्टिकल्स, स्टेशनरी
जिला अब भी रेड जोन में है। आज शहर के बाजारों के निरीक्षण के दौरान काफी चहल-पहल भी दिखाई दी। इस तरह भीड़ को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। लॉकडाउन भी चूंकि 17 मई तक लागू रहना है लिहाजा अब उसके बाद ही कोई फैसला होगा। -नितीश कुमार, डीएम
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