बरेली। रुहेखंड विश्वविद्यालय में अनुदान राशि से लेकर अन्य मदों से मिली धनराशि के खर्च में करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आई है। अनुदान राशि के 63.04 लाख रुपये कहां खर्च हुए? विवि प्रशासन इसका हिसाब नहीं दे सका। बैंक खाते में अनुदान राशि जमा होने से जो ब्याज मिला, उसे भी शासन को नहीं लौटाया। यह पूरा खेल वर्ष 2022-23 की ऑडिट में उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि इसी तरह हर वर्ष विभिन्न तरीकों से शासकीय धन की हेराफेरी की जा रही है। इस पूरे मामले में कार्रवाई के बजाय, विवि प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय को मार्च 2023 में 63,04,159 रुपये मिले थे। इसमें से 61,43,482 रुपये मार्च 2023 में ही खर्च कर डाले गए। ऑडिट टीम ने इसे अनियमित एवं आपत्तिजनक बताया है। विवि प्रशासन ने इसको लेकर ऑडिट टीम के सामने स्थिति भी स्पष्ट नहीं की है। अनुदान राशि पर प्राप्त बैंक ब्याज के 7,85,412 रुपये भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन को नहीं लौटाया। नियम है कि शासन से अवमुक्त अनुदान की धनराशि पर प्राप्त ब्याज को शासन की आय मानते हुए उसे लौटा दिया जाए।
अग्रिम स्वीकृति में भी खेल
ऑडिटरों ने जांच में पाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भवन एवं सड़क निर्माण के लिए उप्र राजकीय निर्माण निगम समेत अन्य कार्यदायी संस्थाओं को 6,23,54,000 रुपये अग्रिम स्वीकृत किए थे, लेकिन इस भुगतान को अग्रिम पंजी में दर्शाया नहीं गया।
3.07 लाख का जारी चेक किया निरस्त
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आईईटी के खाते से 3,07,030 रुपये रुपये का चेक (02005794) 14 फरवरी 2023 को एसबीआई के लिए जारी किया था। बाद में इसे निरस्त कर दिया था। ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख है कि निरस्त चेक की मूल कॉपी व्यय प्रमाणों के साथ मौजूद थी, लेकिन रोकड़बही में इसे काटकर व्यय दर्शाया गया था। इससे 3,07,030 रुपये अधिक व्यय प्रदर्शित हो गया।
अन्य विभागों के संविदा कर्मियों को आईईटी से भुगतान
ऑडिट में पाया गया कि अन्य विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों के मानदेय का भुगतान आईईटी से किया गया, जो अनियमित है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जनवरी 2023 का मानदेय भुगतान आठ फरवरी 2023 को (1,64,560 रुपये) किया था। इसमें 83 हजार रुपये केंद्रीय पुस्तकालय में तैनात तृतीय श्रेणी कर्मी डॉ. नसीम बानो, आईएएसई विभाग में तैनात तृतीय श्रेणी कर्मी मीनाक्षी और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में पादप विज्ञान विभाग के अमित सोनी, राजेंद्र व पंकज मोहन को दिए गए थे।