दी सफाई : जन्म के दौरान ही नाजुक थी हालत
जिला महिला अस्पताल बरेली के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि दो जुड़वां बच्चे निजी अस्पताल से रेफर होकर आए थे। नजरीन का वजन करीब दो किलो और दूसरे का सिर्फ 800 ग्राम था। जब वे आए थे, तभी कहा गया था कि इन्हें वेंटीलेटर की जरूरत है, लेकिन परिजन नहीं माने।
यहां उनको एसएनसीयू में रखा गया था। बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। शॉर्ट सर्किट के बाद बच्चों को रेफर करते समय परिजनों को उसे पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया था लेकिन वे उसे बदायूं मेडिकल कॉलेज ले जाना चाहते थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई।
वर्ष 2018 में जिला महिला अस्पताल परिसर में सौ बेड के मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग की शुरुआत हुई थी। बताया जाता है कि इसके निर्माण के दौरान प्रयोग की सामग्री की गुणवत्ता काफी खराब थी। मंगलवार को शॉर्ट सर्किट होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू हुआ। बिजली मिस्त्री के मुताबिक जहां शॉर्ट सर्किट हुआ, वहां सीलिंग में सीलन थी। वायरिंग के तारों को ढंकने के लिए लगा सेफ्टी पाइप भी गल चुका था।
आशंका जताई कि सीलन की वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ। एमसीबी पैनल न होने से यह अनियंत्रित हो गया। बिजली मिस्त्री ने संभावना जताई कि एमसीबी पैनल होता तो ऐसी घटना नहीं होती। क्योंकि, जैसे ही शॉर्ट सर्किट होता, एमसीबी पैनल से आपूर्ति बंद हो जाती।