नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी से निकलकर टाइगर रिजर्व के जंगल में पहुंचे दो हाथी रविवार रात अमरिया क्षेत्र की आबादी की ओर पहुंच गए। सोमवार को खेत की ओर पहुंचे ग्रामीणों की फसल में मौजूद हाथियों पर नजर पड़ते ही हड़कंप मच गया। जिसके बाद सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना के बाद क्षेत्रीय रेंजर ने मौके पर पहुंचकर हाथियों की कांबिंग शुरू की। हालांकि हाथी पूरा दिन गन्ने की फसल में मौजूद रहकर फसल उजाड़ते रहे। देर शाम को उनको खदेड़ने के प्रयास शुरू किए गए।
टाइगर रिजर्व की बराही व नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी के जंगल की सीमा मिली हुई है। खुली सीमा होने के बाद आए दिन वन्यजीव दोनों ओर विचरण करते रहते हैं। बॉर्डर से सटे लग्गा भग्गा क्षेत्र में तो अकसर हाथियों की मौजूदगी देखी जाती है, लेकिन तीन दिन पूर्व नेपाल के दो हाथी शारदा नदी को पार करते हुए शारदा डैम के रास्ते महोफ रेंज के जंगल पहुंच गए थे। टाइगर रिजर्व प्रशासन को सूचना मिलते ही हाथियों को निगरानी शुरू कर दी थी।
इधर रविवार रात दोनों हाथी जंगल से बाहर निकलकर अमरिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत भूड़ा कैमोर गांव की सीमा में पहुंच गए। हाथियों ने किसानों की गन्ने की फसल को उजाड़ना शुरू कर दिया। सोमवार को गांव के किसान निशान सिंह घर से बाहर निकलकर खेत की ओर पहुंचे तो उनकी नजर खेत में मौजूद दो हाथियों पर गई। देखते ही देखते ग्रामीणों की भारी भीड़ खेत के निकट जमा हो गई। वहीं सूचना मिलते ही वन विभाग के क्षेत्रीय वन दरोगा देवेंद्र कुमार, चेतन कुमार समेत वनकर्मी भी मौके पर पहुंच गए। चूंकि हाथियों को खदेड़ना मुश्किल है, इसके लिए ग्रामीणों को दूर रहने की अपील की गई। रेंजर सतेंद्र चौधरी डब्ल्यूटीआई की टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। इधर शाम तक दोनों हाथी किसान निशान सिंह के खेत से निकल पास के मोबीन खां के खेत में पहुंच गए। करीब दो बीघा गन्ने की फसल भी हाथियों ने उजाड़ दी। शाम तक हाथी खेत में ही मौजूद रहे।
जंगल से बाहर निकल दो नेपाली हाथी भूड़ा कैमोर गांव की सीमा में पहुंच गए हैं। हाथी गन्ने की फसल को उजाड़ रहे हैं, कोई जनहानि न हो सके, निगरानी शुरू कर दी है। उनको वापस खदेड़ने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
- सतेंद्र चौधरी, रेंजर, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग