प्रदेश के कई जिलों में हैं शराब के ठेके, शासन तक पहुंचा मामला
बरेली। एसओजी और बारादरी पुलिस द्वारा पकड़ी गई कानपुर की एक ट्रक शराब का मामला शासन तक पहुंच गया है। प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी शराब तस्करी के आरोपी बरेली के शराब कारोबारी के तार अब सहारनपुर डिस्लरी में हुई सवा सौ करोड़ की टैक्स चोरी से भी जुड़ गए हैं। इतना ही नहीं आबकारी विभाग को तो यह भी शक है कि शराब कारोबारी कहीं अपनी फैक्टरी तो नहीं चला रहा। वहीं से उसने रैपर, ढक्कन और फर्जी बारकोड लगाकर होली पर खपाने के लिए शराब भेजी हो।
पुलिस ने बुधवार को बीसलपुर रोड से ट्रक पकड़ने के बाद जब चालक संजय से पूछताछ की तो उसने बताया कि ट्रक शराब कारोबारी मनोज जायसवाल ने मंगवाया था। पुलिस को शराब पर कानपुर का बार कोड लगा मिला। इससे पुलिस को संदेह हुआ कि जो शराब कानपुर में बिकनी थी, उसे बरेली लाकर तो कारोबारी को घाटा ही होगा। ट्रक का भाड़ा भी देना पड़ेगा और शराब उसी दाम पर बिकेगी। पुलिस का मानना है कि एक बार कोड पर दो ट्रक निकाले गए होंगे। एक ट्रक कानपुर और दूसरा लोड करके बरेली भेजा गया है। चूंकि शराब कारोबारी की बरेली में कई दुकानें हैं, लिहाजा यहां होली पर आसानी से माल खप जाता। पुलिस फरार शराब कारोबारी मनोज जायसवाल को तलाश रही है। वहीं ट्रक पकड़े जाने की सूचना आबकारी विभाग ने शासन को भेज दी है।
ऐसे होता है पूरा खेल
मामला महज एक ट्रक शराब का नहीं बल्कि करोड़ों की टैक्स चोरी और शराब की तस्करी का है। शासन ने शराब की तस्करी और टैक्स चोरी रोकने के लिए बार कोड की व्यवस्था लागू कर रखी है। इसके तहत बार कोड देखकर पता चल जाएगा कि शराब यूपी में किस जिले और किस दुकान की है। कोटे के मुताबिक इलाहाबाद डिस्लरी को बार कोड जारी किए जाते हैं। डिस्लरी में शराब बनने के बाद बोतल पर बार कोड लगा दिया जाता है। बार कोड के मुताबिक शराब को उस जिले के गोदाम पर फिर यहां से दुकान पर भेज दिया जाता है। खेल डिस्लरी और गोदाम से निकलते समय होता है। बार कोड को स्कैन कर फर्जी बार कोड बना लिया जाता है। इस तरह से एक बार कोड पर दो ट्रक माल निकाल दिया जाता था। यह खेल डिस्लरी और गोदाम दोनों जगह से हो सकता है। बरेली में जो ट्रक मिला है, उसमें भी शराब कानपुर के गोदाम से ही लादी गई थी।
एसआईटी और एसटीएफ की रडार पर शराब कारोबारी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों शराब कारोबारियों का बड़ा खेल पकड़ में आया था। बीते दिनों सहारनपुर की डिस्लरी में सवा सौ करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। इसमें शराब कारोबारी मनोज जायसवाल के रिश्तेदार भी साझेदार बताए जा रहे हैं। टैक्स चोरी पकड़े जाने के बाद से ये सभी फरार हैं। शासन एसआईटी से जांच करा रहा है। फरार शराब माफियाओं को पकड़ने के लिए एसटीएफ लगा रखी है। बरेली में बुधवार को जो ट्रक पकड़ा गया है वह भी इसी की एक कड़ी है। इसके बाद अब शराब कारोबारी एसआईटी और एसटीएफ के रडार पर आ गए हैं।
कहीं सब कुछ फर्जी तो नहीं
ट्रक पकड़े जाने के बाद अब जांच पड़ताल शुरू हो गई है। खुद आबकारी विभाग इस बात की आशंका से इनकार नहीं कर रहा है कि शराब फैक्टरी में न बनकर कहीं और बनी हो और उस पर फर्जी बार कोड लगा दिया गया हो। इसके अलावा यह भी संभव है कि सहारनपुर की तर्ज पर एक बार कोड पर दो ट्रक निकाले गए हों। एक ट्रक कानपुर में बिक गया हो और दूसरा यहां भेज दिया गया हो। जल्द ही इसका भी पता चल जाएगा। आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर अमित मिश्र ने बताया कि बार कोड के फर्जी होने से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि शराब बनी कहां है।
जो शराब पकड़ी गई है वह कानपुर से आई है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक बार कोड पर दो ट्रक निकाले गए हों। बार कोड की जांच की जा रही है। - देव नरायन दुबे, जिला आबकारी अधिकारी।