बरेली। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत जिले में खाद्य प्रसंस्करण की नई इकाइयां शुरू होनी है। युवा अपने स्टार्टअप शुरू करने के लिए बैंक और उद्यान विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन योजना गति नहीं पकड़ पा रही है। जिले में 185 के लक्ष्य के सापेक्ष 67 लोगों ने आवेदन किए हैं। इनमें से मात्र 21 आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि 19 लोगों को ही ऋण मिल पाया है। यही रफ्तार रही तो मार्च तक लक्ष्य हासिल नहीं हो सकेगा।जिला उद्यान अधिकारी पुनीत पाठक कहते हैं कि बैंकर्स से जितना सहयोग मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल पा रहा है। बैंकों में 27 आवेदन लंबित हैं। वह लगातार अग्रणी जिला प्रबंधक से संपर्क कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप कुछ बैंक शाखाओं ने सहयोग देना शुरू किया है।
केस-एक
दो महीने की भागदौड़, नतीजा सिफर
मोहनपुर निवासी अब्बास का नाम उन लोगों की सूची में हैं, जिन्हें उद्यान विभाग लाभार्थी मानता है। बैंक ने भी इनके नाम ऋण स्वीकृत कर दिया, लेकिन अभी तक उनके खाते में धनराशि नहीं आई। अब्बास बताते हैं कि दो बार बैंक जा चुके। सर्वे भी हो गया, लेकिन ऋण जारी नहीं हुआ है। बैंक वाले यह भी नहीं बता रहे हैं कि ऋण की राशि कब तक खाते में आएगी।
केस-दो
मेहतरपुर करोड़ निवासी अमरपाल फ्लोर मिल लगाना चाहते हैं। इनका प्रोजेक्ट दस लाख रुपये का है। स्वीकृति के लिए पत्रावली फरीदपुर में लंबित है। अमरपाल का प्रार्थना पत्र 29 दिसंबर 2022 को बैंक में जा चुका है, लेकिन न स्वीकृति मिली, न ही ऋण जारी हो सका। एसबीआई की रजऊपुर शाखा से यही बताया जा रहा है कि बैंक के उच्चाधिकारियों को फाइल भेजी गई है।
केस-तीन
दमखोदा निवासी रामदास स्पेलर, चक्की, मिनी राइस मिल लगाना चाहते हैं। इसके लिए 21 लाख रुपये की जरूरत है। ऋण के लिए 16 जनवरी को ऑनलाइन आवेदन किया था। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाहगढ़ बहेड़ी शाखा के प्रबंधक ने जब उनकी बात नहीं सुनी। मामला अग्रणी बैंक प्रबंधक तक पहुंचा है। इस मामले में ऋण दिलाने की पैरवी रिसोर्स पर्सन कर रहे हैं।
स्टार्टअप की जगह पुराने कारोबारियों को वरीयता
सरकार युवाओं को कर्ज देकर नए स्टार्टअप खड़े कराना चाहती है, लेकिन बैंकर्स उन लोगों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो पहले से कारोबार कर रहे हैं। बैंकर्स ने अब तक जिन लोगों के ऋण मंजूर किए हैं, उसमें पचास फीसदी पुराने कारोबारी हैं। हजियापुर के महमूद मियां और आंवला के अमन गुप्ता को कारोबार विस्तार के लिए ऋण मिला है।
कोट
मैं लगातार योजना की समीक्षा कर रही हूं। बैंकर्स का सहयोग बढ़ जाए तो स्टार्टअप को रफ्तार मिलेगी। सीडीओ और अग्रणी जिला प्रबंधक के साथ बैठक करके अधिक से अधिक स्टार्टअप शुरू कराने का प्रयास करूंगी।
पूजा, डिप्टी डायरेक्टर, उद्यान विभाग