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UP News: बरेली में खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम शब्बू मियां का निधन, चाहने वालों में शोक की लहर

Wed, 14 Aug 2024 11:40 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम शब्बू मियां का मंगलवार को निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे।। कई महीनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। 
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शब्बू मियां नियाजी के घर के बाहर जुटे लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली की अजीम शख्सियत माने जाने वाले खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम सिब्तैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां (66) मंगलवार को दुनिया-ए-फानी को अलविदा कह गए। वह कई महीनों से बीमार चल रहे थे। शहर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। देर शाम 8:10 बजे उन्होंने अपने घर में आखिरी सांस ली। इससे उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। 

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मजहब की दीवार तोड़कर लोग उनको खिराज-ए-अकीदत पेश करने खानकाह पहुंचे। वहां भीड़ जुट गई। देर रात तक लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। शब्बू मियां के निजी सचिव मौलाना कासिम नियाजी ने बताया कि महफिल में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी थी। उसके बाद वह घर आ गए और थोड़ी देर के बाद रूह परवाज कर गई। उन्हें बुधवार को गरीब नवाज मस्जिद परिसर स्थित खानकाही कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 

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सौहार्द और मोहब्बत की मिसाल थे शब्बू मियां
बरेली की नायाब शख्सियत शब्बू मियां सौहार्द और मोहब्बत की मिसाल थे। उन्होंने खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम की जिम्मेदारी संभालते हुए दीन-दुनिया के तमाम काम को अंजाम दिया। माना जाता है कि वह इंसानियत के अलमबरदार रहे और सूफी विचारधारा के संदेश को आगे बढ़ाते हुए हर एक को गले लगाया। वह सभी मिलने वालों का दिल जीत लेते थे। 

धर्म, संप्रदाय, जाति-बिरादरी, ऊंच-नीच और सियासी मतभेद से ऊपर उठ कर उन्होंने हर एक को अपनाया और सब के लिए दरवाजे खुले रखे। हर परेशान हाल की मदत के लिए हमेशा खड़े रहते थे। उन्हें देश-विदेश में होने वाली बड़ी-बड़ी सूफी कॉन्फ्रेंस में उन्हें आमंत्रित किया जाता था।

उनके भाई जाहिद मियां नियाजी ने बताया कि शब्बू मियां पूर्व सज्जादा हजरत शाह हसनी मियां नियाजी के खलीफा रहे और 45 साल तक खानकाह के निजाम को बखूबी संभाला। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने भी दुख का इजहार किया। समाजवादी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दुख जताया है।
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'लोगों के महबूब थे शब्बू मियां'
अंतरराष्ट्रीय शायर प्रो. वसीम बरेलवी ने कहा कि शब्बू मियां लोगों के महबूब थे। हर एक को आपस में जोड़ने का काम किया। वह शहर की गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे। खानकाह के निजाम को बखूबी संभालने के साथ दुनिया के लोगों को भी मिलाने का काम किया। उनके चले जाने से बरेली महरूम हो गई। 

तुलसी मठ के महंत नीरज नयन दास ने कहा कि शब्बू मियां अनमोल व्यक्तित्व के धनी थे। हिंदू हो या मुस्लिम, उन्होंने सभी को अपना बनाया। उनकी भाषा इंसानियत की थी। वह लोगों में भेद करना जानते ही नहीं थे। उनकी सादगी हर किसी को प्रभावित करती थी। बरेली के सौहार्द में भी योगदान रहा है। 

आंवला सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि शब्बू मियां शांति के दूत थे। उनका दुनिया से जाना एक बड़ा नुकसान है। वह बरेली की पहचान थे। उन जैसे इंसान की दुनिया में हमेशा कदर रहेगी। उनकी मिलनसार शख्सियत और इंसानियत लोगों के लिए प्रेरणा रहेगी। 
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