बरेली। स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की लेटलतीफी, इलाज में लापरवाही और बदसलूकी की शिकायतों पर अंकुश लगेगा। प्रदेश सरकार ने बजट में होप 2.2 के तहत देहात क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी की व्यवस्था की है। केंद्र सीसी कैमरों से लैस होंगे, जिनकी वेबकास्टिंग होगी।
दो वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने होप मुहिम शुरू की थी। शुरुआत में मंडलीय अस्पतालों को इसमें शामिल किया गया, फिर सभी जिला अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू हुई। अस्पतालों के परिसर, ओपीडी, वार्ड, ओटी से लेकर अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। वेबकास्टिंग के जरिये सीधे लखनऊ से निगरानी होती है। जारी बजट से अब सीएचसी और पीएचसी को भी जोड़ा जाएगा। इससे चिकित्सा सेवाएं बेहतर होंगी।
दूसरी ओर, दृष्टि और श्रवण बाधित समेत विशेष बच्चों के लिए डे केयर सेंटर खुलने की भी उम्मीद है। इससे 40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले तीन वर्ष तक के बच्चों की देखभाल से कामकाजी अभिभावकों को राहत मिलेगी। मंडल स्तर पर एक सेंटर खुलेगा।
मेडिकल कॉलेज, चिकित्सकों की भर्ती आस अधूरी
मेडिकल हब बरेली में एक अदद मेडिकल कॉलेज की आस फिर पूरी नहीं हो सकी। जबकि, सांसद, विधायक और चिकित्सा संगठनों ने बीते दिनों शासन को पत्र भेजने के साथ ही व्यक्तिगत मुलाकात कर भी मांग रखी थी। बरेली में आसपास के जिलों समेत उत्तराखंड, नेपाल से आर्थिक कमजोर वर्ग के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
नहीं मिला आयुष्मान का बकाया
आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बाद जिले के निजी अस्पतालों का करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये भुगतान कई माह से लंबित है। चिकित्सकों ने रैली निकालकर शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भुगतान की मांग की थी। बजट से भुगतान की आस थी जो पूरी नहीं हो सकी। आईएमए अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह ने बताया कि आयुष्मान के भुगतान समेत 70 से अधिक आयुवर्ग के लोगों के इलाज के लिए अलग पैकेज की भी मांग है। अमर उजाला ब्यूरो