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बरेली में मिसाल : पांच लाख से भरा बैग पड़ा मिला, तरन्नुम और उसके बेटे हन्नान ने लौटा दिया

Sun, 24 Apr 2022 02:08 PM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली

सार

ईमानदारी क्या चीज होती है, यह कोई दस साल के हन्नान और उसकी मां तरन्नुम से सीखे।
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तरन्नुम व उसका बेटा हनान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली। ईमानदारी क्या चीज होती है, यह कोई दस साल के हन्नान और उसकी मां तरन्नुम से सीखे। रास्ते में पड़े मिले पांच लाख रुपये से भरे बैग के मालिक को हन्नान तलाश नहीं पाया तो उसने यह बैग अपनी मां के हाथ में रख दिया। मां के कहने पर दोबारा वहीं पहुंचा जहां बैग पड़ा मिला था। काफी देर धूप में खड़े होकर इंतजार किया और फिर अपना बैग तलाशते हुए पहुंचे ठेकेदार को सुपुर्द कर दिया।
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कैंट के गांव ठिरिया निजावत खां में रहने वाली तरन्नुम ऑटो मैकेनिक की पत्नी है। परिवार में गरीबी का माहौल है, फिर भी उन्होंने और उनके बेटे हन्नान ने ईमानदारी की जो मिसाल पेश की, उसके चर्चे पूरे गांव में हैं। साबरी पब्लिक स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ने वाला हन्नान शाम को घर का कुछ सामान लेने बाहर गया था। इसी दौरान सड़क से गुजरते ऑटो से एक बैग गिरते देखा। हन्नान बैग उठाकर ऑटो के पीछे दौड़ा लेकिन उसे पकड़ नहीं पाया।

घर लौटकर उसने बैग मां तरन्नुम को दिया और पूरी बात बताई। तरन्नुम ने बैग खोलकर देखा तो हैरान रह गईं। उन्होंने हन्नान को वहीं जाकर खड़ा होने को कहा, जहां बैग ऑटो से गिरा था। कहा, बैग का मालिक उसे तलाश करने जरूर लौटेगा। मां के कहने पर मासूम हन्नान काफी देर सड़क पर धूप में खड़ा रहा। कुछ देर बाद मस्जिद ख्वाजा गरीब नवाज से एलान हुआ कि किसी को कोई बैग गिरा मिला हो तो लौटा दे। हन्नान इसके बाद मस्जिद पहुंचा और ठेकेदार फिरासत हैदर खां को उनका बैग लौटा दिया। हन्नान की ईमानदारी का किस्सा इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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स्कूल ने माफ की साल भर की फीस
हन्नान की ईमानदारी का चर्चा आम होने के बाद साबरी पब्लिक स्कूल ने उपहार के तौर पर उसकी एक साल की फीस माफ कर दी है। इसके साथ उसे कोर्स की सारी किताबें और ड्रेस भी फ्री देने का वादा किया है। साबरी पब्लिक स्कूल के प्रबंधक साजिद खां ने हन्नान की तारीफ करते हुए कहा है कि उन्हें फख्र है कि हन्नान उनके स्कूल का छात्र है।

पैसे गिने नहीं, सिर्फ नोटों के बंडल देखे
तरन्नुम का कहना है कि उन्हें बैग में नोटों के बंडल देखकर लालच नहीं आया बल्कि यह ख्याल आया कि जिसकी रकम गिरी है, उसका क्या हाल हो रहा होगा। यही सोचकर उन्होंने अपने बेटे को दोबारा बाहर भेज दिया ताकि कोई अपने पैसे ढूंढता हुआ पहुंचे तो उसे बैग वापस कर दिया जाए। तरन्नुम ने बताया कि उन्होंने बैग खोलकर जरूर देखा लेकिन उसमें नोटों के बंडल देखते ही बंद कर दिया। पैसों को उन्होंने गिना तक नहीं क्योकि वह किसी और की अमानत थी।

कपड़े का बैग बंद करने में गिरा बंडल
ठेकेदार फिरासत हैदर खां ने बताया कि वह अपनी कार से ही ठिरिया निजावत खां आए थे। जब उन्होंने पतली सड़कें देखीं तो ऑटो पकड़ लिया। रकम का बैग कपड़ों के बड़े बैग में रखा था। रास्ते में कपड़ों के बैग का मुंह खुला रह गया तो उन्होंने नोटों वाला बैग अपने पास रखकर उसे बंद किया। इसी दौरान वह बैग गिर गया। कुछ दूर जाने के बाद जब पता चला तो वह चलते ऑटो से कूूद गए। उन्होंने कहा कि हन्नान की ईमानदारी की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है।
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