स्थानीय लोगों से बात करते पुलिस अफसर
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लखनऊ तक दी जानकारी
कुछ देर में ही लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की जानकारियां साझा करने लगे। अनहोनी की आशंका से सहमे लोग एक-दूसरे को फोन कर शहर का हाल जानने के लिए बेचैन रहे। एडीजी, आईजी मौके पर मौजूद अधिकारियों से जानकारी लेते रहे। सूचनाएं डीजीपी व शासन को भी भेजी गईं।
एसपी सिटी संग दूसरे अफसरों ने संभाला मोर्चा
एडीजी दफ्तर में कार्यरत और हाल ही में प्रोन्नत होकर सीओ बने रूपेंद्र गौड़ विवादित स्थल पर पहुंचे। भीड़ को हटाकर चौराहे पर कुर्सियां डालकर बैठ गए। दोनों वर्ग के लोगों को बुलाकर समझाया। एसपी सिटी राहुल भाटी, सीओ थर्ड आशीष प्रताप सिंह और सीओ प्रथम श्वेता यादव ने भी स्थिति संभाली। एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने भी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।
एक पक्ष ने लगाया नई परंपरा का आरोप
विवाद के दौरान एक पक्ष के यज्ञदत्त शर्मा व धर्मेंद्र आदि ने बताया कि जुलूस का सही मार्ग जगतपुर तिराहे से शाहदाना होकर श्यामगंज और वहां से सैलानी में मुन्ना खां की नीम जाने का है। शॉर्टकट के चक्कर में लोग अंजुमन को इधर से निकालना चाहते हैं। पिछले साल दो अंजुमन पीछे रह गई थीं। संचालकों के अनुरोध पर दोनों को इधर से निकलवा दिया गया था। इस बार भी सात अंजुमनें निकल गईं। इस पर उन लोगों ने विरोध दर्ज कराया जो सही था। आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी।
दूसरे पक्ष ने भड़काने का लगाया आरोप
अंजुमनों की ओर से आईएमसी के प्रवक्ता डॉ. नफीस खान ने पुलिस-प्रशासन से बात की। बताया कि हर साल इधर से ही जुलूस निकलता है। इस बार भी सात अंजुमनें गईं। अगर रास्ता गलत था तो बाद में बल्ली क्यों लगा दी गई। शायद किसी ने बस्ती के लोगों को भड़का दिया।