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सैन्य जवान संक्रमित

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बरेली। मिलिट्री अस्पताल में शनिवार को फार्मासिस्ट का प्रशिक्षण लेने पहुंचा एक जवान कोरोना संक्रमित निकला। उसे कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज भी लग चुकी हैं। उसे मिलिट्री अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती किया गया है।
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जिले के 32 सौ लोगों की शनिवार को कोरोना जांच की गई। इसमें मिलिट्री अस्पताल में फार्मासिस्ट प्रशिक्षण के लिए पलवल (हरियाणा) से आए जवान की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में पता चला कि उसे कोविशील्ड की दोनों डोज लग चुकी हैं। वह आठ दिसंबर को बरेली पहुंचा था। उसके साथ छह और लोग बरेली आए थे। 11 दिसंबर को प्रशिक्षण शुरू होना था। जांच में पॉजिटिव मिलने पर उसे भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है। आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक शेष लोगों की रिपोर्ट निगेटिव मिली है। उसके संपर्क में कुल दस लोग रहे। जिनकी सैंपलिंग होगी।
उधर, कोरोना टीकाकरण की मुहिम के तहत शनिवार को 52 हजार लोगोें के लक्ष्य के सापेक्ष 33276 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। इसमें 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के 5362, 45 पार के 15851 लोगों को कोविशील्ड और 12063 लोगों को कोवाक्सिन की डोज लगाई गई। अब तक 2793648 लोगों को पहली और 1404150 लोगोें को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है।
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अपने ही जवाब में घिरीं संक्रमित को
निगेटिव की रिपोर्ट देने वाली लैब
बरेली। इंग्लैंड से बरेली आए एनआरआई को संक्रमित होने के बावजूद वापस लौटने के लिए निगेटिव रिपोर्ट दे दिए जाने के गंभीर मामले में दोनों लैब स्वास्थ्य विभाग को दिए स्पष्टीकरण में मान लिया है कि उन्होंने अवैध कलेक्शन सेंटर से भेजे गए सैंपल की जांच कर रिपोर्ट दी थी। इस जवाब के बाद यह साफ हो गया है कि अवैध कलेक्शन सेंटर के साथ दोनों लैब भी इस गोलमाल में शामिल थीं।
नवंबर के अंतिम सप्ताह में इंग्लैंड से एक एनआरआई बरेली के कैंट इलाके में अपने पैतृक घर आया था जो दिसंबर के पहले सप्ताह में लौट गया था। इंग्लैंड लौटने से पहले उसने राजेंद्रनगर की एक लैब में आरटीपीसीआर जांच कराई तो वह पॉजिटिव निकला। इसके बाद उसका सैंपल पास ही की दूसरी लैब पर ट्रूनेट जांच के लिए आया जिसकी उसे निगेटिव होने की रिपोर्ट दे दी गई। इसी रिपोर्ट पर वह फ्लाइट पकड़कर इंग्लैंड लौट गया।
एनआरआई के पॉजिटिव होने की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि वह संक्रमित होने के बावजूद लौट चुका है। इसके बाद जांच शुरू की गई तो कोविड सैंपल के अवैध कलेक्शन सेंटर का भी पता चला। दोनों लैब को तभी नोटिस देकर जवाब मांगा गया था। लंबी टालमटोल के बाद एक-एक कर अब दोनों लैब का जवाब स्वास्थ्य विभाग को मिल गया है।
दोनों लैब ने अपने जवाब में अवैध कलेक्शन सेंटर से मिले सैंपल की जांच करने की बात कही है। सफाई दी है कि सैंपल की जांच के लिए एनआरआई के संबंध में गलत स्थानीय पता भी कलेक्शन सेंटर चलाने वाले की ओर से दर्ज कराने की बात कही गई है। इससे यह साफ हो गया है कि दोनों लैब अवैध होने के बावजूद इस कलेक्शन सेंटर से मिलने वाले सैंपलों की जांच कर रही थीं। इन सैंपलों की रिपोर्ट में मनमाफिक ब्योरा भी दर्ज किया जा रहा था।
कई सवालों के जवाब नहीं
आज हो सकती है कार्रवाई
एनआरआई को गलत रिपोर्ट देने और रिपोर्ट में गलत ब्योरा दर्ज करने के मामले में घिरी लैब की ओर से कई सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं। एनआरआई की रिपोर्ट पर दोनों लैब के लैब तकनीशियन के मोबाइल नंबर कैसे दर्ज हुए और अवैध कलेक्शन सेंटर से सैंपल क्यों लिया, इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। अफसरों के मुताबिक सोमवार को प्रकरण पर कार्रवाई होगी।
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