वर्ष 2019 में एनआरसी के विरोध में किए गए बवाल को लेकर कोतवाली में दर्ज मुकदमे में भी इस बवाल के बाद मौलाना का नाम बतौर साजिशकर्ता बढ़ा दिया गया। ऐसे में मूल मुकदमे के अलावा दस और मुकदमों में पुलिस ने मौलाना को आरोपी बताकर न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने की कोर्ट से अपील की थी।
चार अदालतों में पेशी से बढ़ी 11 मुकदमों की रिमांड
मंगलवार को कोतवाली से संबंधित छह मुकदमों में सीजेएम अलका पांडेय के कोर्ट में मौलाना तौकीर की वर्चुअल तरीके से पेशी हुई। यहां सभी छह मामलों में मौलाना की न्यायिक अभिरक्षा रिमांड मंजूर हो गई है। इसके साथ ही बारादरी थाने में बवाल के दिन दर्ज दो मुकदमों में एसीजेएम प्रथम के कोर्ट में मौलाना तौकीर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी हुई और कोर्ट ने रिमांड मंजूर कर लिया।
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इसी तरह प्रेमनगर थाने के एक मामले में एसीजेएम पंचम के यहां व कैंट थाने के एक मुकदमे में जेएम द्वितीय के यहां पेशी के बाद रिमांड मंजूर कर लिया गया। इसके अलावा एक मामला किला थाने में दर्ज हुआ था। सभी मामलों में अगली पेशी 28 अक्तूबर को होना तय हुई है।
पेशी पर खुफिया अमला रहा अलर्ट
मौलाना तौकीर रजा की पेशी के मामले में मंगलवार को दोपहर बाद तक सरगर्मी बढ़ी रही। खुफिया अमला अलर्ट रहा। कोर्ट के बाहरी हिस्से व दरगाह परिसर के आसपास फोर्स की तैनाती बढ़ा दी। बवाल के बाद से ही मौलाना तौकीर रजा को फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में रखा है। मौलाना के तारीख पर बरेली लाए जाने की चर्चा थी, लेकिन त्योहार से पहले सुरक्षा बंदोबस्त बनाने में लगी पुलिस ने कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराने का अनुरोध किया।
फतेहगढ़ जेल प्रशासन ने भी फोर्स की कमी के बारे में जानकारी दी थी। वीसी के जरिये मौलाना की पेशी कराई गई। संबंधित कोर्ट में मौलाना के वकील भी मौजूद रहे। परिवार के लोग व करीबी भी कोर्ट के आसपास मौजूद रहे। खुफिया अमले से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने आंतरिक रूप से काफी व्यवस्था कर रखी थी। बिहारीपुर चौकी क्षेत्र में दरगाह के आसपास के मिश्रित आबादी वाली बस्ती में भी काफी फोर्स तैनात रहा।
सौ से ज्यादा गिरफ्तारी कई निर्माण निशाने पर
बवाल के दिन दस मुकदमे दर्ज किए गए। एक मुकदमा उसके बाद फर्जी पत्र तैयार करने का लिखा गया। इन मुकदमों में तीन हजार से ज्यादा वांछित हैं। सौ से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें मौलाना के कई करीबी शामिल हैं।
मौलाना के खिलाफ 1982 से लेकर अब तक करीब 17 मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन कायदे से गिरफ्तारी व कार्रवाई अब की है। पुलिस और प्रशासन ने मौलाना के करीबियों की अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई शुरू की थी। कई भवन व प्रतिष्ठान सील किए हैं तो कुछ में तोड़फोड़ की है।