'योग किसी धर्म का हिस्सा नहीं'
उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, जो सदियों पहले सूफी संत अपने अनुयायियों के दिल व दिमाग और शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए 40 दिन का चिल्ला कराते थे। योग न सनातन धर्म का हिस्सा है और न ही इस्लाम धर्म का हिस्सा है। जो लोग इसको धर्म से जोड़ते हैं या किसी भी धर्म का टाइटल लगाते हैं, वो सरासर नाइंसाफी का काम करके जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।
मौलाना ने आगे कहा कि देश के सभी मदरसों में रोजाना छात्र व छात्राओं को योग कराना चाहिए। पहले योग करने की ट्रेनिंग दी जाए। सिखाया जाए फिर उनसे योग कराया जाए। योग को यह समझ कर करें कि ये हमारे पाठ्यक्रम का हिस्सा है।