कई गोवंश बिना टैग के मिले
गांव गुर्जर गोटिया में बनी गोशाला में कई गोवंश बिना टैग के मिले। जांच टीम को भूसा, चोकर व हरे चारे का स्टॉक बुक नहीं मिला। उन्होंने पंचायत सचिव को निर्देश दिए कि सभी तरह के स्टॉक रजिस्टर अलग-अलग बनाकर रखें। राम नगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत कंथरी के सचिव राम बाबू व प्रधान राकेश से रिकॉर्ड देखा। जिसके बाद ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद की ग्राम पंचायत वागरपुर के मजरा नौगवां अहिरान पहुंचे। वहां सचिव तुषार राज व केयर टेकर सुरेंद्र ने बताया 119 गोवंश वर्तमान में है।
यह भी पढ़ें- दर्दभरी कहानी: घर बेच बेटे को लंदन में पढ़ाया, उसने बुढ़ापे में अकेला छोड़ा, वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर पिता
टैगिंग रजिस्टर पर डॉक्टर के हस्ताक्षर ही नहीं
फतेहगंज पूर्वी में करतोली के वृहद गो आश्रय केंद्र पहुंची टीम ने प्रधान से जानकारी ली। तो पता चला कि टेंडर वाले लोग दस रुपये किलो भूसा देते थे। टैगिंग रजिस्टर पर डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। सचिव के ट्रांसफर होने के कारण स्टॉक का रजिस्टर नहीं मिल सका है और न बिल बाउचर का मिलान हो सका।
शाही में संयुक्त निदेशक डॉ. सतीश अग्रवाल के नेतृत्व में टीम बृहस्पतिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे लालपुर गांव की गोशाला पहुंची। यहां पर पशु चिकित्सक डॉ. हरिशंकर गंगवार से पशुओं का तिथि अनुसार टैग रजिस्टर दिखाने के लिए कहा, तो वह नहीं दिखा सके। सचिव रवींद्र विकास की ओर से भूसा खरीद के असली बिल प्रस्तुत न करने पर नाराजगी जताई।
भूसा खरीदने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर दी जाए परमिशन
फतेहगंज पश्चिमी में गो आश्रय केंद्रों के लिए केंद्रीयकृत टेंडर की ओर से भूसा खरीद को गलत बताया। ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र वीर गंगवार और जितेंद्र गंगवार ने ज्ञापन में कहा कि पहले की तरह ग्राम पंचायत की ओर से भूसा खरीद किया जाना चाहिए। जिससे फर्म के द्वारा किए जा रहे घोटाला से बचा जा सके।
अपर निदेशक (गोधन) डॉ. नेमपाल सिंह ने बताया कि तीन टीमें गोशालाओं का निरीक्षण कर रही है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है, हालांकि खंड विकास अधिकारी को स्थानीय स्तर पर भूसा खरीदने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए है।
पशुधन मंत्री ने सात दिन के अंदर मांगी चारा घोटाले की रिपोर्ट
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने चारा घोटाले पर डीएम अविनाश सिंह से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट सात दिन के भीतर आएगी। रिपोर्ट आते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने सर्किट हाऊस में डीएम के साथ बैठक में घोटाले की तह तक जाने के निर्देश दिए। कहा कि अगर कोई वित्तीय अनियमितता हुई है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
उन्होंने बताया डीएम की रिपोर्ट आने से पहले ही उन्होंने शासन स्तर से जांच कराई है। अब डीएम की रिपोर्ट आते ही दोनों जांच के निष्कर्ष का अध्ययन कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो एक और उच्च स्तरीय जांच कमेटी लखनऊ से भेजेंगे। फिलहाल जो जानकारी डीएम से मिली है उसके मुताबिक भूसा तो सस्ता खरीदा गया, लेकिन तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसीलिए इसमें रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।