'पोस्टर-बैनर सिर्फ दिखावा'
शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम से मोहब्बत करना हमारा ईमान व अकीदा है। मगर उनकी शिक्षा पर अमल करना बेहद जरूरी है, ये असल मोहब्बत का पैमाना है। पोस्टर-बैनर तो सिर्फ एक दिखावा है। इसको मोहब्बत नहीं कहा जा सकता। पैगंबर-ए-इस्लाम ने टकराव की नीति कभी भी नहीं अपनाई बल्कि अपने विरोधियों से हमेशा समझौता किया और बातचीत से मसले का हल किया। इस्लाम के इतिहास में दो समझौते बहुत मशहूर हैं। जो 'सुलह हुदैवीया' और 'मिसाके मदीना' के नाम से जाना जाता है।