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बरेली बवाल: प्रधानी से विधानसभा तक का चुनाव लड़ा, पर नहीं मिली सफलता; परिवार के लोग भी सियासत में न हुए कामयाब

Thu, 02 Oct 2025 12:51 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

बरेली के मौलाना तौकीर रजा ने प्रधानी से लेकर विधानसभा तक का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। मौलाना तौकीर के परिवार के सदस्यों को भी सियासत में कामयाबी नहीं मिली।
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मौलाना तौकीर रजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में हजरत रेहान रजा खां की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनका बेटा मौलाना तौकीर रजा खां सियासी मैदान में कूदा, मगर कोई मुकाम नहीं पा सका। ग्राम प्रधान से लेकर विधानसभा तक के चुनाव में मौलाना ने किस्मत आजमाई, मगर कभी सफलता नहीं मिली। 
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मौलाना के परिवार के अन्य सदस्यों ने भी जोर-आजमाइश की, मगर वह भी सफल नहीं हुए। रेहान-ए-मिल्लत हजरत रेहान रजा खां दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन रहे हैं। इससे पहले उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाते हुए बरेली लोकसभा सीट से 1980 में चुनाव लड़ा था, मगर जीत नहीं सके थे। 

बाद में कांग्रेस से निकटता के चलते पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें एमएलसी बनवाया था। उनका इतना ही राजनीतिक सफर रहा। उसके बाद उन्होंने दरगाह की गद्दी संभाल ली और धर्मगुरु की हैसियत से अपनी पहचान बनाई।
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मौलाना तौकीर रजा खां - फोटो : वीडियो ग्रैब
1987 में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा, नहीं मिली जीत
मौलाना तौकीर रजा का पुश्तैनी गांव बदायूं का करतौली है। वहीं से सबसे पहले 1987 में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा, जो वह जीत नहीं सका। इसके पांच साल बाद 1992 में बदायूं की बिनावर विधानसभा से चुनाव लड़ा, मगर वह भी हार गया। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के समय उनकी पार्टी जनता दल से बरेली की कैंट विधानसभा सीट से मौलाना ने किस्मत आजमाई और यहां भी मात मिली।

मौलाना तौकीर रजा - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 2001 में मौलाना ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) बनाई। 2009 के लोकसभा चुनाव में मौलाना ने कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में मौलाना ने समाजवादी पार्टी को अपना समर्थन देने के लिए कहा था। 

 

मौलाना तौकीर रजा खां - फोटो : अमर उजाला
2014 के लोकसभा चुनाव में मौलाना ने बसपा का समर्थन किया
मई 2013 में मौलाना को हैंडलूम कॉर्पोरेशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में मौलाना ने बहुजन समाज पार्टी का समर्थन किया। 2022 के चुनाव में मौलाना ने फिर कांग्रेस का समर्थन किया।

 

मौलाना तौकीर रजा खां - फोटो : अमर उजाला
इस बीच मौलाना तौकीर के चाचा मौलाना मन्नान रजा खां ने भी 1989 में लोकसभा का चुनाव लड़ा। मौलाना के भाई मौलाना तौसीफ रजा खां भी 1983 में पीलीभीत से लोकसभा का चुनाव लड़े थे। मौलाना तौसीफ ने सियासत में लंबा समय गुजारा। पहले लंबे समय कांग्रस में रहे, फिर समाजवादी पार्टी में आ गए। वह पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के काफी निकट रहे। 

बरेली में बवाल के बाद तैनात पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फोर्स की कमी बताकर वापस ली सुरक्षा, बवाल से जोड़ रहे लोग
बरेली में काजी-ए-हिंदुस्तान असजद मियां के दामाद सलमान हसन उर्फ सलमान मियां की सुरक्षा वापस लिए जाने के पीछे पुलिस फोर्स की कमी का हवाला दे रही है। हालांकि, इसे शहर में हुए बवाल और कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। सलमान मियां ने बुधवार को इस सिलसिले में डीएम व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।

 

बरेली शहर में पुलिस फोर्स ने किया रूट मार्च - फोटो : अमर उजाला
बवाल के बाद मंगलवार को दरगाह की ओर से प्रेसवार्ता कर ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी। इसके बाद ही सलमान मियां की सुरक्षा हटाने की कार्रवाई को पुलिस-प्रशासन की ओर से जवाब के रूप में देखा जा रहा है। 

 

कोतवाली के बाहर मौजूद पुलिस फ़ोर्स - फोटो : अमर उजाला
सलमान मियां के गनर नवाब और नफीस बुधवार सुबह ही पुलिस लाइन लौट आए। सुरक्षा हटाने की वजह के बारे में अधिकारियों ने फिलहाल कोई बयान नहीं दिया है।

 

कमिशनर भूपेन्द्र एस चौधरी और डीआईजी अजय साहनी ने पुलिस फ़ोर्स के साथ किया शहर में निकाला रूट मार्च - फोटो : अमर उजाला
प्रतिसार निरीक्षक हरमीत सिंह का कहना है कि इन दिनों फोर्स की जरूरत संवेदनशील स्थानों पर ज्यादा है। दूसरे जिलों से पुलिसकर्मियों को यहां बुलाया गया है। ऐसे में जिले के पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की भी समीक्षा की जा रही है।

 

पुलिस ने ड्रोन करवाई निगरानी - फोटो : अमर उजाला
खानदान के खास लोगों को मिली है सुरक्षा
दरगाह आला हजरत बरेलवी मसलक से जुड़ा बड़ा केंद्र है। दरगाह परिसर में हर समय पुलिस की सुरक्षा गारद रहती है। इन दिनों वहां और भी ज्यादा फोर्स लगी है। इसके अलावा काजी-ए-हिंदुस्तान असजद मियां व आला हजरत खानदान के कुछ और लोगों को सुरक्षा मिली हुई है। 

 
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करोलान स्थित रज़ा मस्जिद के बाहर तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पुरानी सरकारों के वक्त से यह सुरक्षा लगातार चल रही है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा होती रहती है। सूत्रों के मुताबिक, पहले सलमान मियां को दोनों सुरक्षाकर्मियों के वेतन का 50 फीसदी भुगतान करना होता था, अब ये 25 फीसदी रह गया था।
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