मौलाना ने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया गया। जबकि हकीकत यह है कि 1525 बाबर के अहद में मस्जिद का निर्माण शुरू हुआ। 1530 में मस्जिद का निर्माण मुकम्मल हुआ। मस्जिद के निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी बाबर के एक हिंदू पदाधिकारी ने निभाई थी।
मौलाना ने कहा कि दिन के उजाले में संभल की जामा मस्जिद के साथ नाइंसाफी की जा रही है। मौलाना ने रिपोर्ट के कुछ अंश मीडिया में आने पर आपत्ति जताई। कहा कि रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की जाती है, उसका कोई भी पहलू सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। मगर, रिपोर्ट के कुछ पहलू मंजरे आम पर कैसे आ गए। इसका मतलब है कि जानबूझकर ये तरीका अपनाया गया है। भारत का मुसलमान इस रिपोर्ट को खारिज करता है।