बरेली। असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों के लिए जुमे के दिन नमाज अदा करने के लिए दो घंटे के शून्यकाल के लिए 90 साल की परंपरा को खत्म कर दिया गया है। इसका आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विरोध किया है।
असम विधानसभा की कार्यवाही पर सख्त नाराजगी जताई है। कहा कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा हमेशा मुसलमानों के खिलाफ जहरीले बयान देते हैं। कभी वह एनआरसी के नाम पर असाम और बंगाल के मुसलमानों को डराते है तो कभी सीएए के नाम पर पूरे भारत के मुसलमानों को डराने की कोशिश करते हैं। मौलाना का कहना है कि मुख्यमंत्री ने असम में मदरसों का वजूद खत्म कर दिया है। यह धार्मिक और भाषाई शिक्षा के खिलाफ बहुत जुर्म है। संविधान ने धार्मिक शिक्षा के लिए संस्थान खोलने, बनाने और संचालन करने के लिए मुकम्मल आजादी दी है। असम सरकार अल्पसंख्यकों को संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। संवाद