फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'वोट से भर दी झोली': पैगम्बर की गुस्ताखी और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई पर क्यों खामोश हैं अखिलेश, देना होगा जवाब

Sun, 13 Oct 2024 08:27 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली

सार

मौलाना ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष को उन मदरसों का इतिहास पड़ने की जरूरत है, ये वही मदरसे हैं जिन्होंने जंग-ए-आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बिरादराने वतन के साथ मिलकर देश को आजाद कराया।
विज्ञापन
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने राष्ट्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्वारा मदरसों के खिलाफ की गई कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन लोगों को चाहिए कि पहले मदरसों का इतिहास पढ़ें फिर मदरसों के बारे में बात करें। 

विज्ञापन

मौलाना ने कहा कि राष्ट्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष हमेशा किसी न किसी मदरसे के विरुद्ध जांच पड़ताल करते रहते हैं या सरकार को पत्र लिखते हैं, वो कोई न कोई बहाना बनाकर मदरसों को कटघरे में खड़ा करते रहते हैं। पहले जम्मू-कश्मीर के मदरसों को लेकर के आपत्ति की फिर असम के 1400 मदरसों को बंद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अब उत्तर प्रदेश के मदरसों को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं। 

मौलाना ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष को उन मदरसों का इतिहास पड़ने की जरूरत है, ये वही मदरसे हैं जिन्होंने जंग-ए-आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बिरादराने वतन के साथ मिलकर देश को आजाद कराया। वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ जामा मस्जिद दिल्ली से फतवा देने वाले मौलाना फज्ले हक खैराबादी और मौलाना रजा अली खां बरेलवी मदरसे के ही छात्र थे।

मौलाना ने कहा कि जो लोग मदरसों पर आपत्ति कर रहे हैं वो हकीकत से अलग थलग हैं, लाखों मदरसों में अगर कोई एक मदरसा गलत कार्य करता मिलता है तो उसके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन सभी मदरसों को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। देखा जा रहा है की एक की गलती पर 99 मदरसों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
विज्ञापन

मौलाना ने कहा कि चंद दिनों पहले यति नरसिंहानंद ने पैग़म्बर इस्लाम की शान में गुस्ताखी की और अब मदरसों को बंद करने को लेकर आवाज उठ रहा है। ऐसी सूरत-ए-हाल में मुसलमान सपा मुखिया अखिलेश यादव से सवाल पूछ रहे हैं कि वो किस के साथ खड़े हैं। यती नरसिंहानंद के साथ या मुसलमानों के साथ? विधानसभा और लोकसभा में झोली भर के मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया, मगर इस वक्त मुसलमानों को जरूरत है कि अखिलेश यादव हमारी आवाज विधानसभा और संसद में उठाएं, मगर वो खामोश हैं। हम उनसे इस खामोशी का राज पूछना चाहतें हैं, कि वो आखिर किस वजह से खामोश हैं? उनको पैग़म्बर इस्लाम और मदरसे के मुद्दों पर जवाब देना ही होगा।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें