दो साल से चल रही थी रंजिश
एक प्लॉट की बिक्री और रास्ते को लेकर दोनों परिवारों में दो साल से रंजिश का मामला सामने आया है। जुलाई में हुए हमले में नामजद नन्हे बाबू जेल से छूटा तो दुश्मनों ने मौका देखकर हिसाब बराबर कर लिया।
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ग्रामीणों के मुताबिक झम्मनलाल राजपूत ने कुछ साल पहले अपने एक प्लॉट की बाउंड्री कराई तो पड़ोसी नन्हे बाबू के घर का रास्ता तंग हो गया। इसे लेकर दोनों पक्षों में तनातनी चलती रही। मामला एसडीएम कोर्ट में पहुंचा तो झम्मनलाल ने प्लॉट केसरपुर गांव निवासी पुत्तू यादव को बेच दिया। सौदे में नन्हे बाबू का पड़ोसी भूरे यादव बिचौलिया बना। यहीं से नन्हे बाबू व भूरे के बीच रंजिश की नींव पड़ील।
दो साल पहले भी इसको लेकर मारपीट हुई थी, जिसकी रिपोर्ट दोनों ओर से कराई गई थी। बताते हैं कि इस साल जुलाई में भूरे यादव व उसके भाई बाबू पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया गया। इसमें नन्हे बाबू को भी जेल भेजा गया। कुछ समय पहले ही वह जमानत पर आया था। तब से दोनों पक्ष मौके का इंतजार कर रहे थे। इस बीच यादव पक्ष ने नन्हे बाबू की जान ले ली।