बरेली। मलेरिया के मामलों की रोकथाम के लिए संवेदनशील इलाकों में इनडोर रेसिड्यूल स्प्रे (आईआरएस) के बावजूद मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। इससे विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मानक के मुताबिक आईआरएस नहीं किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
एंटोमोलॉजिस्ट अभिषेक कुमार के मुताबिक, फतेहगंज पश्चिमी, मझगवां, मीरगंज, शेरगढ़ ब्लॉक मच्छरजनित रोगों के लिहाज से संवेदनशील हैं। 18 जुलाई तक जिले में मलेरिया के 674 मरीज मिल चुके हैं। इसमें से 72 फीसदी केस इन्हीं क्षेत्रों से हैं। इन क्षेत्रों में जहां आईआरएस किया गया है, वहां भी मरीज मिल रहे हैं। जबकि, माना जाता है कि मानकों के अनुसार दो बार आईआरएस किए जाने के बाद नए केस आने की आशंका नहीं होती। इसमें लार्वा नष्ट करने से लेकर स्प्रे, फॉगिंग, साफ-सफाई आदि गतिविधियां शामिल होती हैं।
मझगवां ब्लॉक के नौहारा हसनपुर, इस्माइलपुर, नूरपुर बुजुर्ग में आईआरएस के बावजूद मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार आईआरएस के बाद भी इन गांवों में मलेरिया के नए मरीज मिलने का सिलसिला थमा नहीं है। ब्यूरो