नवाबगंज। तहसील के पास की दुकानों में चल रहे जनसेवा केंद्रों पर महज एक हजार रुपये में मनचाहा प्रमाणपत्र बनवाया जा सकता है। शिकायत के बाद प्राथमिक जांच में आरोप सही मिलने पर सोमवार को नायब तहसीलदार ने एक जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर लैपटॉप, मोहरें और अभिलेख जब्त किए। दूसरे केंद्र का संचालक टीम के आने की भनक लगने पर दुकान पर ताला डालकर फरार हो गया।
तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने बताया कि लंबे समय से शिकायतें मिल रहीं थीं कि इन जनसेवा केंद्रों पर फर्जी मूलनिवास, जाति व अन्य प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। कई ऐसे प्रमाणपत्र मिले भी। इसके बाद उन्होंने नायब तहसीलदार सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई के आदेश दिए।
सोमवार को नायब तहसीलदार सत्यवीर सिंह ने तहसील के गेट पर स्थित जनसेवा केंद्रों पर छापा मारा। इस दौरान एक जनसेवा केंद्र का संचालक दुकान पर ताला डालकर फरार हो गया। वहीं, दूसरे केंद्र से कई संदिग्ध अभिलेख बरामद हुए। यहां से लैपटॉप और मोहरें भी कब्जे में लिए गए हैं। अभिलेख और लैपटॉप में सेव डाटा की पड़ताल की जा रही है।
ऐसे करते थे खेल
नायब तहसीलदार ने बताया कि जांच में सामने आया है कि जनसुविधा केंद्र संचालक पिछली तिथियों में प्रमाणपत्र जारी करते थे। किसी सही प्रमाणपत्र की आवेदन संख्या और प्रमाणपत्र संख्या व बार कोड को एडिट कर देते थे। इसके बदले आवेदक से एक हजार रुपये वसूले जाते। इस प्रमाणपत्र की संख्या को इंटरनेट पर डालने पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता। ऑफलाइन इसका इस्तेमाल करके धांधली की जा सकती है।
दो साल पहले भी प्रशासन कर चुका है कार्रवाई
दो साल पहले भी तहसील प्रशासन ने जनसुविधा केंद्र से फर्जी अभिलेख जब्त किए थे। इस दौरान दुकानों को सील किया गया था। कुछ समय बाद ही यह खेल फिर शुरू हो गया। कार्रवाई के दौरान फरार हुआ आरोपी ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। नायब तहसीलदार सत्यवीर सिंह ने बताया कि बरामद अभिलेखों व लैपटॉप की जांच में पूरा खेल सामने आएगा।