बरेली। गाय-भैंसों के लिए घातक लंपी वायरस से बचाव के लिए विकसित बायो लंपी वैक्सीन की क्षमता और प्रमाणिकता की प्राथमिक जांच भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर परिसर में हुई। उसका अंतिम परीक्षण मुक्तेश्वर में हुआ है।
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि लंपी वायरस की चपेट में आने से देश भर में पशुओं की मौत हुई थी। वर्ष 2019 से वैक्सीन ईजाद करने के लिए नेशनल वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनआरसीई) ने शोध शुरू किया। विकसित वैक्सीन का परीक्षण आईवीआरआई इज्जतनगर की लैब और फील्ड में किया गया। वैक्सीन का प्राथमिक परीक्षण इज्जतनगर स्थित लैब में चूहों, खरगोशों पर किया। सकारात्मक परिणाम मिलने पर मुक्तेश्वर में वैक्सीन केंडिडेट वायरस का रेगुलेटेड पशुओं पर परीक्षण किया गया। इसके लिए बरेली से गोवंश ट्रक से मुक्तेवश्वर ले गए थे। 10 बछड़ों को वैक्सीन दी और पांच को उनके साथ बिना वैक्सीन के रखा। वैक्सीन लगाने के बाद इम्युनिटी विकसित होने में माह भर लगते हैं। लिहाजा, माह भर बाद पशुओं में वायरस इंजेक्ट किया तो जिन्हें वैक्सीन लगी थी वह सुरक्षित रहे। जबकि अन्य में लंपी रोग के लक्षण उभर आए।
फील्ड परीक्षण में भी दिखा वैक्सीन का असर
मुक्तेश्वर में परीक्षण के बाद आईवीआरआई की ओर से वैक्सीन के प्रभावी होने की पुष्टि के बाद वैक्सीन का फील्ड परीक्षण हुआ। राजस्थान के बांसवाड़ा, जोधपुर, उदयपुर, अलवर, उत्तर प्रदेश के मथुरा और हरियाणा के हांसी और हिसार में ट्रायल किया गया। वैक्सीन वाले सभी पशु पूरी तरह सुरक्षित रहे, जबकि इन्हीं जगहों पर अन्य पशु लंपी रोग से प्रभावित थे।
गर्भधारण कर चुके पशु पर नहीं होता दुष्प्रभाव
वैक्सीन जांच के दौरान गर्भधारण कर चुके पशुओं पर भी परीक्षण हुआ तो दुष्प्रभाव नहीं दिखा। दूध उत्पादन की क्षमता पर भी विपरीत असर नहीं हुआ। वैक्सीन की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पशुओं को बुखार जैसी सामान्य दिक्कत भी नहीं होती। डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि वैक्सीन लंपी स्किन डिजीज से पशुओं को पूरी सुरक्षा प्रदान करती है।