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Health: किसी के शरीर में रेंग रहे कीड़े तो कोई आत्मा से परेशान, तनाव और अकेलापन बना रहा मानसिक बीमार

Sun, 18 Jan 2026 04:41 PM IST
मुकेश कुमार अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के जिला अस्पताल के मनकक्ष में सायकोटिक डिसॉर्डर के मामले बढ़े हैं। कई ऐसे मरीज आए, जिनकी समस्या सुनकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। चिकित्सकों के मुताबिक तनाव और अकेलापन के कारण इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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डॉक्टर साहब... पिछले कुछ दिन से शरीर के अंदर कीड़े रेंग रहे हैं। कोई मेरे अंदर समाया है जो मनमुताबिक कार्य करा रहा है। ऐसी समस्या सुनकर बरेली जिला अस्पताल के डॉक्टर भी चौंके। मनोचिकित्सक के पास भेजा तो काउंसलिंग में सायकोटिक डिसॉर्डर का पता चला।

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मनोचिकित्सक अशीष कुमार के मुताबिक, पहले सायकोटिक डिसॉर्डर के साल में आठ-दस मरीज आते थे, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर और दिसंबर में ही पांच मरीज पहुंचे। बताया कि सामान्य व्यक्ति के मन में विचार उठते हैं, लेकिन वह सोच-समझकर सही निर्णय लेता है। 

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सायकोटिक डिसॉर्डर से पीड़ित व्यक्ति की निर्णय लेने, वास्तविक और भ्रम के बीच अंतर कर पाने की क्षमता बेहद कम हो जाती है। इससे वह मन में उठ रहे विचार को वास्तविक मानकर व्यवहार करने लगता है। काल्पनिक दुनिया में जीने लगता है। उन्हें चित्र दिखाई देने व ध्वनि सुनाई देने का भ्रम होता है।

उन्होंने बताया कि मानव मस्तिष्क में डोपामाइन न्यूरो ट्रांसमीटर होता है। यह दिमाग और शरीर के बीच तालमेल बिठाता है। कई बार डोपामाइन किन्हीं वजहों से जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो सिजोफ्रेनिया की स्थिति बनती है। हालात और बिगड़ते हैं तब सायकोटिक डिसॉर्डर बनता है।

केस- 1
पुराना शहर निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग को शरीर में कीड़े रेंगने के विचार आते थे। परिवार के लोग उनकी बात को मजाक समझकर टाल जाते थे, पर समस्या बढ़ी तो इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने मनोचिकित्सक के पास भेज दिया। तब रोग की पुष्टि हुई। काउंसलिंग जारी है।

केस- 2
हाफिजगंज निवासी 56 वर्षीय व्यक्ति खुद के ही शरीर में किसी और की आत्मा प्रवेश करने की बात परिवार से की। पास के डॉक्टर ने सीटी स्कैन, एमआरआई कराई पर सब ठीक मिला। तब वे मनोचिकित्सक के पास पहुंचे। जांच कराने पर रोग का पता चला। अब इलाज चल रहा है।

वजह
विश्वास की कमी, रुचियों का खत्म होना, भावनाएं जाहिर न कर पाना, चिंता, अनुवांशिकी, पारिवारिक तनाव, अकेलापन आदि।

इलाज
संदिग्ध लक्षण उभरने पर मनोचिकित्सक को दिखाएं। एंटीसायकोटिक दवा, सीबीटी थेरेपी समेत कई दिन की काउंसलिंग होती है।
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सायकोटिक डिसॉर्डर से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम
मनोचिकित्सक के मुताबिक, बीते साल सहारनपुर निवासी पंजाब के पूर्व डीजीपी के बेटे की मौत हुई थी। पूर्व डीजीपी ने बेटे के सायकोटिक डिसॉर्डर से पीड़ित होने की बात कही थी। 2024 में हाथरस में एक किशोर ने 11 साल के बच्चे की हत्या की थी। उसमें भी सायकोटिक डिसॉर्डर के लक्षण थे। वर्ष 2018 में बुराड़ी हत्याकांड में परिवार को शेयर्ड सायकोसिस डिसॉर्डर का पता चला था। 

यहां करें संपर्क 
मनोरोग की आशंका पर टोल फ्री नंबर 18008914414 या 14416 पर कॉल करें। जिला अस्पताल के मनकक्ष में सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक दिखा सकते हैं।
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