उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में फर्जी कागजातों के आधार पर छह ग्रामोद्योग संस्थानों को करोड़ों का ऋण स्वीकृत कर दिया गया। कागजातों के सत्यापन में नायब तहसीलदार और लेखपाल की मिलीभगत रही। ऋण लेकर संस्थानों के पदाधिकारी गायब हो गए। शासन स्तर से त्रिस्तरीय जांच में करोड़ों के फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद एंटी करप्शन की ओर से बरेली कोतवाली में नायब तहसीलदार और लेखपाल समेत 28 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
जिला ग्रामोद्योग कार्यालय बरेली में छह ग्रामोद्योग इकाइयों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का ऋण स्वीकृत और वितरण किए जाने की शिकायत शासन स्तर पर की गई थी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने त्रिस्तरीय जांच कराई तो आरोप सही पाए गए। इसके बाद मामले में जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) से कराने की संस्तुति की गई।
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एंटी करप्शन की जांच में भी फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए। दस्तावेजों के सत्यापन में नायब तहसीलदार चौबारी नरेंद्र कुमार और लेखपाल रिछा नाजिम मिया की भूमिका भी संदेह के घेरे में पाई गई। जांच आख्या उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को प्रेषित की गई।
मामले में अब एंटी करप्शन के उप निरीक्षक प्रवीण सान्याल की ओर से कोतवाली में नायब तहसीलदार नरेंद्र कुमार, लेखपाल नाजिम मियां समेत फर्जीवाड़ा कर करोड़ों का ऋण हड़पने वाले छह खादी ग्रामोद्योग स्थानों के पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी धन के गबन समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।