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लॉकडाउन का सबकः किसी ने धंधा बदला तो किसी ने जीने का तरीका

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गली-गली घूमकर लोगों के बाल काटते निसार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कोरोना काल में बेरोजगार बैठने की बजाय दूसरे कामों से आजीविका कमा रहे मेहनतकश

बरेली। कोरोना ने लॉकडाउन लगवाया तो हजारों मेहनतकश बेरोजगार हो गए। तमाम लोग हाथ पर हाथ धरे लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे हैं तो कई लोगों ने वक्त के मुताबिक खुद को ढाल लिया। कुछ ने व्यवसाय का तरीका बदला तो कुछ ने व्यस्त रहने के दूसरे बहाने खोज लिए। अब यह लोग परिवार को पालने के साथ ही दूसरों के लिए मिसाल बने हुए हैं।
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ग्रेटर आकाश कॉलोनी में रहने वाले संजय पांडेय फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करते थे। लॉकडाउन में जब काम मिलना कम हुआ तो अपने गांव चले गए और खेतीबाड़ी देखने लगे। परेशान होने की बजाय उन्होंने खेती को उन्नत बनाने का काम शुरू किया है। बारादरी नई बस्ती के निवासी विशाल राजपूत एक बैंक में नौकरी करते थे। पिछली साल लॉकडाउन में उनकी नौकरी चली गई। फिर एक टू व्हीलर कंपनी में कलेक्शन का काम मिल गया लेकिन लॉकडाउन में वो भी बंद हो गया। अब वह लोगों की मदद कर रहे हैं। किसी पीड़ित के बारे में जानकारी मिलती है तो सहायता करने जरूर जाते हैं।
कंजादासपुर के मुकेश कश्यप टेंपो चलाते थे। लॉकडाउन में टेंपो बंद हुए तो परिवार की रोजी की खातिर सब्जी का ठेला लगा लिया। मुकेश इलेक्ट्रीशियन का काम भी जानते हैं। जरूरत पड़ने पर लोग मोबाइल पर उन्हें कॉल करते हैं और वह काम कर देते हैं। एयरफोर्स इलाके के नई बस्ती में रहने वाले रामबाबू शर्मा की रेलवे कॉलोनी में कपडे़ की दुकान है। लॉकडाउन में दुकान बंद करनी पड़ी तो सैनिटाइजर और मास्क का धंधा शुरू किया है। अभी घर से ही व्यवसाय कर रहे हैं। इसी तरह बाकरगंज निवासी निसार अहमद का जाटवपुरा में हेयर कटिंग सैलून बंद हुआ तो उन्होंने साइकिल पर पेटी रखकर आसपास गलियों में घूमना शुरू किया है। वह गलियों में लोगों की हेयर कटिंग और शेव कर देते हैं। निसार का कहना है कि धंधे के दौरान वह सामाजिक दूरी, मास्क के नियम का पालन करते हैं। सैनिटाइजर भी साथ रखते हैं।
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