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लहरा उठा परचम-ए-रजवी

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दरगाह से इस्लामिया ग्राउंड उर्स स्थल पर जाता परचम कुशाई का जुलूस।
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तीन रोजा उर्स-ए-रजवी का आगाज, पहले दिन सजी नातिया महफिल

बरेली। इस्लामिया इंटर कालेज के मैदान पर शनिवार को उर्स-ए-रजवी का आगाज के साथ परचम-ए-रजवी लहरा उठा। उर्स की पहले रोज नातिया महफिल सजी और हुज्जतुल इस्लाम के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
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सुन्नी बरेलवी सिलसिले के रुहानी पेशवा आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेली के तीन रोजा उर्स का आगाज परचम कुशाई की रस्म से किया गया। यह रस्म दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने उलमा और अकीदतमंदों की मौजूदगी में अदा की। इससे पहले उर्स की शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। दिन में रजवी परचम आजम नगर स्थित हाजी अल्लाह बख्स के निवास से सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी की कयादत में दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां सलामी के बाद परचम उर्स स्थल पर लाया गया। जहां आला हजरत के नारों के बीच परचम कुशाई की गई। इसके बाद सुब्हानी मियां और अहसन मियां ने देश दुनिया में अमन और खुशहाली और कोरोना के खात्मे की दुआ की।
शाम को हाजी गुलाम सुब्हानी व आसिम नूरी ने मिलाद का नजराना पेश किया। इस मौके मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने हुज्जतुल इस्लाम हजरत हजरत हामिद रजा खां के किरदार पर रोशनी डाली। रात 10:35 बजे हुज्जतुल इस्लाम के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। सज्जदानशीन अहसन मियां ने दुआ-ए-खैर की। रात में नातिया मुशायरा हुआ। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि रविवार को उर्स के दूसरे रोज सुबह कुरान ख्वानी के बाद सुबह आठ बजे महफिल का आगाज होगा। इस बीच 9:58 बजे रेहाने मिल्लत व 10:30 बजे हजरत जिलानी मियां का कुल शरीफ होगा। रात में 9:00 उलमा की तकरीर और देर रात 01:40 बजे मुफ्ती आजम हिंद का कुल शरीफ होगा।

‘आका, गुलाम, शाह हर एक के फैले हुए हैं हाथ तेरे दर के सामने’

बरेली। उर्स-ए-रजवी के पहले रोज इस्लामियां इंटर कालेज मैदान पर तरही नातिया मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें देश के मशहूर शोअरा इकराम ने कलाम पेश किए।
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कारी नोमान के तिलावते कुराने के बाद मुफ्ती सगीर अख्तर ने अपने कलाम में कहा ‘दिल की मुराद मिलने में बस कुछ ही देर है, दिल है बिछा हुआ दरे सरवर के सामने।’ डॉ. अम्न तिलयापुरी ने पढ़ा ‘अहमद रजा ने दौलते मक्किया जब लिखी, सदियां खामोश हो गईं पल भर के सामने। आका गुलाम शाह कलंदर हर एक के, फैले हुए है हाथ तेरे दर के सामने।’ बिलाल राज के कलाम के इस शेर को खूब पसंद किया गया- ‘हाजिर गदा है रौजा-ए-अनवर के सामने, प्यासे खड़े हुए हैं समंदर के सामने। जो कुछ हुआ जहान में जो होगा हश्र तक, रौशन है सारा हाल पयम्बर के सामने।’ इसी कड़ी में नवाब अख्तर, असरार नसीमी, रईस बरेलवी, डॉ. अदनान काशिफ, मुफ्ती मुईन उद्दीन, मुफ्ती अनवर अली, कारी रिजवान रजा, मह शर बरेलवी आदि ने कलाम पेश किए। निजामत कारी नाजिर रजा ने किया।
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