बरेली। अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में रविवार को दूसरे दिन भी बिकनी किलर चार्ल्स शोभराज के प्रत्यर्पण पर बहस हुई। अलग-अलग देशों में सजा के अलग-अलग प्रावधान उसके प्रत्यर्पण पर बाधा बने रहे। ऐसे में शोभराज के प्रत्यर्पण पर निर्णय नहीं हो सका। तर्क और कानूनी पेंचीदगियों पर विधि विद्यार्थियों की राय का मूल्यांकन कर परिणाम घोषित किया गया। लुंबनी बौद्ध यूनिवर्सिटी नेपाल और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली के विधि छात्रों की टीम ने पहला स्थान हासिल किया।
दो दिवसीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भारत समेत तुर्की, साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, बांग्लादेश और इंडोनेशिया के विधि छात्र-छात्राओं ने नेपाल की जेल में बंद चार्ल्स शोभराज के प्रत्यर्पण पर बहस में ऑनलाइन और ऑफलाइन हिस्सा लिया। लुंबनी बौद्ध यूनिवर्सिटी की टीम ने तर्क दिया कि शोभराज को एक बार हत्या के मामले में सजा हो चुकी है। उसकी उम्र 65 वर्ष से ज्यादा है। 19 साल से जेल में बंद शोभराज का आचरण भी ठीक रहा है। ऐसे में नेपाल किसी अन्य देश को उसका प्रत्यर्पण नहीं करेगा।
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और लखनऊ की एमईटी यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के बीच बहस हुई। मुख्य अतिथि राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रोफेसर मनीष सिंह रहे। अध्यक्षता जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असद मलिक ने की। इस मौके पर प्रोफेसर आदेश मौर्य, प्रोफेसर जेपी यादव, प्रोफेसर अमित सिंह, डॉ. बकेश शर्मा, डॉ. आदित्य आदि मौजूद रहे।