एसआरएमएस में दक्षिण और उत्तर भारत की दो नृत्य कला और दो संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। उत्तर भारत की मीराबाई और दक्षिण भारत की अंडल का कृष्ण प्रेम कथक और भरतनाट्यम में दिखा। लता के भजनों, मीरा के पदों पर खुद नलिनी और कमलिनी का भावपूर्ण कथक देखकर बड़े तो बड़े छात्र भी डूब गए।
‘कृष्णमयी मीरा अंडल’ की दो घंटे की सुर, लय, ताल, थाप और भाव भंगिमाओं के संगम ने ऐसा समा बांधा कि दर्शक उसमें खो गए। मीराबाई की कहानी बचपन से शुरू होती है और विवाह, उसके बाद भोजराज सिंह की मृत्यु, मीरा का गृह त्याग और अंत में कृष्ण के साथ उनका विवाह। एक-एक क्षण की भावपूर्ण प्रस्तुति देखते ही बन रही थी। मीरा के साथ ही दक्षिण के विष्णुचित्तर की बेटी अंडल की कहानी भी चलती है। भरतनाट्यम में अंडल के बचपन की शरारतों के साथ कृष्ण के प्रति समर्पण, प्रेम, कृष्ण के साथ रासलीला की कहानियां और फिर विष्णुचित्तर के सपने में कृष्ण का आना, अंडल के साथ विवाह का प्रस्ताव, अंत में अंडल और कृष्ण का विवाह लोगों को अंदर तक भावों से भर गया। मीरा और अंडल की कहानी में सिर्फ दो नृत्य कला और दो संस्कृति ही नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों की प्रस्तुति है। ‘कृष्णमयी मीराअंडल’ की प्रस्तुति ने नलिनी-कमलिनी के साथ 35 अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों के आभामंडल ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में चेयरमैन देवमूर्ति ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर ट्रस्ट सेक्रेटरी आदित्य मूर्ति, सुभाष मेहरा, डॉ. आरसी पुरोहित, प्रो. प्रभाकर गुप्ता, प्रो. जगन्नाथ साहू, प्राचार्य डॉ. अनंत श्रीवास्तव, डॉ. हिमांशु होरा, संतोष खरे आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजन में टायरो क्लब के सदस्यों का सहयोग रहा।