कांवड़ियों के जत्थे से दलित युवक को निकाले जाने के बाद सुर्खियों में आए बुझिया गांव ने अब जातीय सौहार्द की मिसाल कायम की है। पचास साल से नफरत में जी रहे दलित और सवर्ण साथ पूजा अर्चन को राजी हो गए हैं। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप से पहले गांव के मंदिर में दलितों के जलाभिषेक पर लगी रोक हटी अब कांवड़िए हरिद्वार से जल लेकर आए तो दलितों ने भी पैर धोकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद सभी ने एक साथ मंदिर में जलाभिषेक किया।
तीन अगस्त को बाबा केदार दास के साथ खमरिया मढ़ी से कावड़ियों का जत्था हरिद्वार गंगा जल लेने के लिए रवाना हुआ तो बुझिया गांव के दलित विनोद ने बाबा केदार दास पर अभद्रता करने का आरोप लगा दिया था। उसका कहना था कि दलित होने के कारण उसे जत्थे में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि बाबा केदार दास ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि शराब का आदी होने के कारण उसे मना किया गया है। इसके बाद हंगामा हुआ तो पुलिस भी पहुंच गई। बाबा भी धरने पर बैठ गए थे हालांकि बाद में जत्थे में दलित को शामिल कर लिया गया था। पुलिस प्रशासन ने गांव जाकर दलित और सवर्णों में संवाद कराया था। इसके बाद बुझिया गांव के प्राचीन शिव मंदिर से दलितों के पूजा अर्चना करने पर पचास साल पुरानी रोक को हटा लिया गया था। सोमवार को बाबा केदार दास जत्थे के साथ जैसे ही बुझिया गांव की सीमा में पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। दलितों के साथ गांव वालों ने कांवड़ियों की अगुवाई की। पैर धोकर स्वागत किया गया। इसके बाद सभी लोगों ने एक साथ जलाभिषेक किया। प्रसाद वितरण में भी सभी ने भाग लिया।