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पितरों को मिलेगी शांति... श्मशान भूमि में रखीं अस्थियों का होगा विसर्जन

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बरेली। सालों से विसर्जन के इंतजार में श्मशान भूमि में रखी अस्थियों का अब सामूहिक विसर्जन होगा। अमर उजाला की पहल पर सामाजिक संस्थाएं भी इस मुहिम में शामिल हो गई हैं। बृहस्पतिवार को सिटी श्मशान भूमि और फिर 28 सितंबर को गुलाब बाड़ी श्मशान भूमि में रखी अस्थियों का विधि विधान से कछला में सामूहिक विसर्जन किया जाएगा।
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इन दिनों पितृ पक्ष चल रहा है और पितरों के तर्पण के लिए लोग तरह-तरह के आयोजन कर रहे हैं। कोई घर में श्राद्ध कर रहा है तो कोई दान-पुण्य कर रहा है। इन सबके बीच तमाम ऐसे लोग भी हैं, जो दुनिया छोड़ चुके अपने बुजुर्गों को भूल गए हैं और उनकी अस्थियां विसर्जित करना भी उन्होंने जरूरी नहीं समझा। विभिन्न श्मशान भूमि में इन बुजुर्गों की अस्थियां एक मटकी में कैद होकर रह गई हैं। सिटी श्मशान भूमि पर ऐसे ही करीब 400, संजयनगर में 300 और गुलाब बाड़ी में करीब सौ अस्थि कलश लटक रहे हैं। इनके रखने को भी श्मशान भूमि में जगह भी कम पड़ती जा रही है। जिसके चलते अतिरिक्त कमरे बनवाने पड़े हैं।
अमर उजाला ने पितृ पक्ष में इन बुजुर्गों के तर्पण का मुद्दा उठाया तो सामाजिक संस्थाएं भी इस मुहिम में साथ आ गई हैं। मंगलवार को महिला जागृति मंच की अध्यक्ष डॉ. मनु नीरज सिटी श्मशान भूमि में पहुंचीं। वहां उन्होंने त्रिलोकीनाथ शर्मा से बात की और तय किया कि बृहस्पतिवार को वह यहां रखी अस्थियों का कछला में विसर्जन करेंगी। इसके बाद वह गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि पर भी वहां पहुंचीं। यहां मिले परिसर प्रभारी गिरीश चंद्र सिन्हा ने बताया कि एक सामाजिक संस्था ने उनसे संपर्क किया है। पिछले साल की तरह ही यह संस्था 28 सितंबर को सभी अस्थियों का कछला में सामूहिक विसर्जन करेगी।
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विसर्जित हो गईं अस्थियां... तब लेने पहुंचे
अमर उजाला की खबर पढ़कर सोमवार को एक युवक पांच साल बाद सिटी श्मशान भूमि पहुंचा। वहां उसने अस्थियों के बारे में जानकारी की तो पता लगा कि अमर उजाला के अभियान के तहत 2017 तक की अस्थियों का पिछले साल ही विसर्जन हो चुका है। इसके बाद वह लौट गया।
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