देवेंद्र के सीने में कई राज, न हथियार मिले न किसान
कल्लू के एनकाउंटर के बाद तीन जिलों की पुलिस ने कटरी खंगाली थी लेकिन गिरोह के पास मौजूद हथियारों का जखीरा आखिर तक नहीं मिल सका था। इनमें से कई हथियार तो पुलिस से ही छीने गए थे। अगवा किए हरियाणा के तीनों फार्मरों को भी पुलिस नहीं तलाश सकी। बताया गया कि गिरोह ने उन्हें मार दिया है लेकिन उनके शव भी नहीं मिल सके। देवेंद्र फौजी साल भर तक बचे-खुचे गिरोह का नेतृत्व करता रहा लेकिन बाद में उसने भी आत्मसमर्पण कर दिया। देवेंद्र को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई पर उसके सीने में दबे राज कभी बाहर नहीं आ सके।
सबसे युवा और खूंखार था देवेंद्र : विजय राणा
पटियाली सीओ विजय राणा के मुताबिक तब कल्लू, नज्जू व गिरोह के अन्य बदमाशों की अपेक्षा देवेंद्र की उम्र काफी कम थी। गिरोह में जल्दी ही उसने नंबर दो की हैसियत बना ली थी। उसे गिरोह में शॉर्प शूटर के तौर पर जाना जाता था। पुलिस से मोर्चे के दौरान वही सबसे आक्रामक तेवर दिखाता था।
पुलिस अधिकारियों के बीच यह भी हैरत की बात रही कि देवेंद्र कभी सीधे तौर पर सामने नहीं आता था। जब गिरोह घिरता था तो देवेंद्र खुद के साथ दूसरे साथियों को लेकर निकल भागता था। विजय राणा बताते हैं कि 15 जनवरी 2006 को जब फतेहगंज पूर्वी की कटरी में कल्लू को मुठभेड़ में मारा गया तो देवेंद्र नदी के उस पार से फायरिंग कर रहा था। कल्लू की बंदूक के शांत होते ही देवेंद्र भाग गया था।
देवेंद्र के गांव में सन्नाटा
बदमाश देवेंद्र फौजी को फांसी की सजा होने से उसके गांव पटनिया में सन्नाटा फैला हुआ है। फांसी की सजा होने की जानकारी लगने के बाद देवेंद्र के घर में दूसरे दिन भी चूल्हा नहीं जला। फर्रुखाबाद न्यायालय ने 29 मार्च को 18 वर्ष पहले तीन पुलिस कर्मियों व ग्रामीण की हत्या में डकैत कलुआ के साथी देवेंद्र फौजी को फांसी की सजा सुनाई है।