फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: 152 साल पहले स्टीम इंजन से शुरू हुआ सफर वंदे भारत तक पहुंचा, रेलवे को ऐसे मिली रफ्तार

Wed, 13 Aug 2025 04:02 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

रुहेलखंड क्षेत्र में साल 1873 में बरेली जंक्शन बनने के साथ स्टीम इंजन से रेल का सफर शुरू हुआ था। आज वंदे भारत समेत लग्जरी ट्रेनें रफ्तार भर रही हैं। इससे जिले के विकास को भी रफ्तार मिल रही है। 
विज्ञापन
बरेली जंक्शन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जंग-ए-आजादी से लेकर अब तक 152 साल में रेलवे के क्षेत्र में तमाम उतार-चढ़ाव रहे। 1873 में बरेली जंक्शन बनने के साथ स्टीम इंजन से शुरू हुआ सफर अब राजधानी, वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी लग्जरी ट्रेनों तक पहुंच चुका है।

विज्ञापन

 
बरेली जंक्शन के बाद 1875 में इज्जतनगर रेलवे स्टेशन की स्थापना हुई थी। इस दौरान अवध व रुहेलखंड रेलवे ने लखनऊ से बरेली तक रेलवे लाइन का विस्तार किया। 1990 के दशक में रेलवे के आधुनिकीकरण की शुरूआत हुई, जो अब तक जारी है। 1994 में दिल्ली-लखनऊ रेल लाइन के दोहरीकरण के बाद बरेली जंक्शन एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा। इससे जिले के विकास को भी रफ्तार मिली।

यह भी पढ़ें- UP: 'न धर्म बदला... न शादी की', छह महीने बाद बरेली लौटी युवती ने किया दावा; सौतेली मां पर लगाए आरोप
विज्ञापन


दिल्ली-लखनऊ के बीच अब से 100 साल पहले लखनऊ मेल के रूप में सुपरफास्ट ट्रेन मिली थी। 1870 के दशक में बरेली-अलीगढ़, बरेली-दिल्ली, बरेली-लखनऊ, बरेली-रोजा पैसेंजर गाड़ियां शुरू की गईं। 1952 में इज्जतनगर मंडल का गठन होने के बाद बरेली को उत्तराखंड से भी कनेक्टिविटी मिली। 

रामनगर, हल्द्वानी, काठगोदाम, ठकनपुर, हरिद्वार, ऋषिकेश तक रेल लाइनों का विस्तार किया गया। 1990 का दशक खत्म होते-होते स्टीम इंजनों की जगह डीजल इंजनों और 2000 आते-आते इलेक्ट्रिक इंजनों ने ले ली।

1995 में अंतिम बार गुजरा स्टीम इंजन 
ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ बरेली-चंदौसी-अलीगढ़ और चंदौसी-मुरादाबाद लाइन का विस्तार किया गया। स्टेशन अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने बताया कि बरेली जंक्शन होते हुए 1995 में अंतिम बार लखनऊ मेल स्टीम इंजन के साथ गुजरी थी। जंग-ए-आजादी से भी जंक्शन, बरेली सिटी, इज्जतनगर स्टेशनों का इतिहास जुड़ा हुआ है। 

दिल्ली-लखनऊ रेल लाइन के दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या भी बढ़ी। अब से 25 साल पहले सन 2000 तक बरेली होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या महज 60 थी, जो अब बढ़कर 200 से ज्यादा हो गई है। बरेली से देश के कोने-कोने के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं।

बरेली-भुज, बरेली-इंदौर, बरेली-लोकमान्य तिलक, बरेली-वाराणसी, बरेली-दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस का प्रारंभिक स्टेशन बरेली ही है। 30 साल पहले शुरू की गई लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस पूरे रुहेलखंड में बरेली को मुंबई से जोड़ने वाली इकलौती ट्रेन थी। अब तीन हो चुकी हैं। 
 
विज्ञापन

मीटरगेज लाइन खत्म होने के बाद बंद हो गया श्यामगंज स्टेशन
30 साल पहले तक इज्जतनगर रेल मंडल का श्यामगंज में भी रेलवे स्टेशन था। मीटर गेज लाइन ब्राड गेज होने के बाद यह स्टेशन बंद हो गया। श्यामगंज स्टेशन से इज्जतनगर और इज्जतनगर से सीधे उत्तराखंड के पहाड़ों तक कनेक्टिविटी थी। उन दिनों रेल लाइनों के स्लीपर लकड़ी के होते थे। 

श्यामगंज स्टेशन रेलवे का प्रमुख लकड़ी डिपो हुआ करता था। उत्तराखंड से लकड़ी सीधे श्यामगंज आया करती थी। यह रेल लाइन श्यामगंज, प्र्रेमनगर, मॉडल डाउन, राजेंद्र नगर, गांधीनगर, जनकपुरी होते हुए इज्जतनगर तक थी। अब स्टेशन और रेल लाइन की जमीन पर कब्जा हो चुका है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें