पांच हजार में किसानों को मिलेगी डिवाइस
डॉ. बृजेश के मुताबिक संस्थान की ओर से विकसित पोर्टेबल डिवाइस का वजन 175 ग्राम है। यह ओवम पिकअप मशीन की तर्ज पर ही काम करती है, फिर हार्मोनल थेरेपी होती है। इसके प्रयोग से प्रजनन की संभावना 50 फीसदी तक बढ़ने की पुष्टि हुई है। इसे कई बार प्रयोग कर सकते हैं। हर बार महज सुई बदलने की जरूरत होती है जो पांच रुपये में मिल जाती है। शोध टीम में वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र कुमार, डॉ. एसके सिंह, डॉ. जेके प्रसाद, डॉ. एके तिवारी और इंजीनियर एचसी यादव शामिल रहे।
पहले हाथ से मसल देते थे गांठ, होता था रक्तस्राव
वर्षों पहले गाय और भैंस की सीओडी में गांठ बनने पर इसे हाथ से मसल दिया जाता था। इससे आंतरिक रक्तस्राव होता था। हार्मोन थेरेपी आने से इसमें सुधार हुआ, मगर यह सर्वसुलभ नहीं है। परिणाम भी शत-प्रतिशत नहीं मिलते। तीसरी पद्धति ओवम पिकअप मशीन रही। इसके सकारात्मक परिणाम मिलने लगे, मगर इसका बाजार मूल्य 25 लाख रुपये है। ज्यादातर किसान इसे खरीद नहीं सकते हैं। ऐसे में लोग गाय-भैंसों को उनके हाल पर लावारिस छोड़ देते हैं।