डिजास्टर मैनेजमेंट के टेक्नीकल रिसोर्स पर्सन ने मेयर को सौंपी रिपोर्ट, कहा- टनल से गुजर चुके हैं तमाम लोग
बरेली। पशु चिकित्सा और अनुसंधान के लिए देश भर में जाने-माने संस्थान आईवीआरआई में मानव शरीर पर घातक असर छोड़ने वाली सैनिटाइजर टनल लगाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस टनल से गुजरने वालों के शरीर पर मौजूद कोरोना वायरस के खत्म होने की तो कोई गारंटी नहीं थी, उल्टे इसके रसायन गंभीर बीमारी जरूर दे सकते थे। संस्थान में बगैर परीक्षण इस मशीन का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा होने के बाद आईवीआरआई के अफसर बचाव पर उतर आए हैं।
नगर निगम के सैनिटाइजेशन प्रोसेस यूनिट के इंचार्ज और डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी के टेक्निकल रिसोर्स परसन एसके सूरी ने आईवीआरआई के अधिकारियों और स्टाफ को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए संस्थान में लगाई गई सैनिटाइजर टनल की जो रिपोर्ट मेयर को सौंपी है, उसके मुताबिक आईवीआरआई को यह टनल एक बड़ी कंपनी के चेयरमैन की ओर से कई दिन पहले दान की गई थी। इस सैनिटाइजर टनल में आइसोप्रोपाइल एल्कोहल, ग्लिसरीन और रोज वाटर का प्रयोग किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रसायनों के इस्तेमाल का जिक्र कंपनी के चेयरमैन की ओर से आईवीआरआई को भेजे गए पत्र में भी किया गया है।
शरीर पर जहर जैसी प्रतिक्रिया दे सकते थे केमिकल, इसलिए तुरंत कराया बंद
एसके सूरी की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि लिखा है कि एमएसडीएस मैटेरियल सेफ्टी डाटा शीट के मुताबिक आइसोप्रोपाइल एल्कोहल का मनुष्यों पर इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन और खिंचाव, आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत जैसे गंभीर लक्षण पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा अगर यह केमिकल गले में पहुंच जाए तो जहर की तरह भी प्रतिक्रिया कर सकता है। खतरनाक रसायन का मशीन में इस्तेमाल होता देख उन्होंने तत्काल इस मशीन को स्विच ऑफ करा दिया।
फोटो: टनल से निकलने पर कर्मचारी के सिर पर दिख रही केमिकल की बूंदें
रिपोर्ट में जिक्र दो दिन से चल रही थी मशीन आईवीआरआई प्रशासन ने किया साफ इनकार
डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी के रिसोर्स परसन एसके सूरी ने बताया कि जब वह नगर निगम के चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर एमपीएस राठौर के साथ आईवीआरआई में निरीक्षण करने पहुंचे थे तो उनके सामने ही संस्थान का स्टाफ लगातार सैनिटाइजर टनल से होकर गुजर रहा था। आईवीआरआई के एक कर्मचारी के टनल से गुजरते हुए उन्होंने उसकी तस्वीर भी खींची। इस तस्वीर में उसके सिर पर केमिकल की बूंदें साफ झिलमिलाती नजर आ रही हैं। हालांकि इस कर्मचारी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थीं। उन्होंने पूछताछ की तो पता चला कि आईवीआरआई में दो दिन से सैनिटाइजर टनल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस टनल से स्टाफ ही नहीं संस्थान के वैज्ञानिक और अधिकारी भी काफी तादाद में गुजर चुके थे। उन्होंने तत्काल मशीन बंद कराई और इसका प्रयोग न करने का सुझाव दिया। एसके सूरी के मुताबिक उन्होंने इन तथ्यों का जिक्र अपनी रिपोर्ट में भी किया है। हालांकि आईवीआरआई प्रशासन का कहना है कि सैनिटाइजर टनल संस्थान में स्थापित जरूर करा दी गई थी लेकिन अभी उसका प्रयोग शुरू नहीं किया गया था।
अभी केमिकल का परीक्षण नही किया गया है। आम मशीनों में हाइपोक्लोराइड का प्रयोग हो रहा है जो मनुष्यों के लिए नुकसानदायक है। टनल का प्रयोग किया जाएगा तो उसमें एल्कोहल का प्रयोग होगा। - डॉ. वीके गुप्ता, संयुक्त निदेशक आईवीआरआई