बर्ड फ्लू के डर से चिकन, मीट या अंडा खाने से परहेज करने वालों के लिए अच्छी खबर यह है कि इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए ऐहतियात सिर्फ इतना बरतना है कि इन्हें 70 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक के तापमान पर पकाकर खाएं। इतने तापमान पर इस फ्लू का कारक वायरस एच5एन1 जिंदा नहीं रहता।
पशु चिकित्सा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बरेली में इस फ्लू का अभी कहीं कोई प्रभाव नहीं है। एहतियातन बरेली मंडल के सभी जिलों में मुर्गा - मुर्गी के सैंपल जांच के लिए भरे जा रहे हैं। बृहस्पतिवार शाम तक कुल 362 सैंपल जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में भेजे जा चुके थे। इसमें से अकेले बरेली जिले से 161 सैंपल हैं। अभी तक किसी भी सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है और न ही संदिग्ध हाल में कहीं भी पक्षियों के मरने की सूचना है। अपर निदेशक (पशु चिकित्सा) डा. एनपीएस गहलोत ने बताया कि बरेली जिले में 21 पशु चिकित्सालयों के मार्फत मुर्गी फार्म और ब्रायलर फार्म में चिकन और अंडे के स्टाक पर नजर रखी जा रही है। पशु चिकित्सकीय स्टाफ की छह रैपिड ऐक्शन टीमें भी निरीक्षण में उतारी गई हैं।
लीलौर झील पर भी निगाह
बरेली (ब्यूरो)। बर्ड फ्लू की आशंका के मद्देनजर जिले के लीलौर झील पर भी निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए वन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। वसंत ऋतु के आखिर तक यहां साइबेरियन सारस रहते हैं। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. केपी सिंह ने बताया कि झील क्षेत्र में भी अभी किसी पक्षी की अस्वाभाविक मौत नहीं हुई है।