साल 2020 में मिली थी पाउडर बनने में सफलता
डॉ. घोष ने बताया कि साल 2020 में पहला फार्मूला तैयार करने में सफलता मिली। यह पाउडर था। पानी के साथ मिलाकर प्रभावित स्थान पर इसका लेपन किया जाता है। इस एंटीटिक फाइट फार्मूलेशन का सफल परीक्षण उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में 700 गाय, भैंस और कुत्तों पर किया गया। फिर इसे पुणे की निजी कंपनी को रिलीज किया गया। इसके बाद क्रीम को तैयार करने के लिए शोध कार्य शुरू हुआ। साल 2021-22 में यह भी तैयार कर लिया गया। जिसे हाल ही में दिल्ली के एग्री इनोवेट को सौंप दिया गया है।
एक किलनी पांच मिली लीटर तक पीती है खून
किलनी की 107 प्रकार की प्रजातियां होती हैं। ये शरीर पर चिपककर धीरे-धीरे खून चूसते हुए उन्हें कमजोर बना देती हैं। एक पशु पर औसतन एक साल में एक से दो हजार किलनी चिपकती हैं। एक किलनी दो से पांच मिली लीटर खून पीती है। इससे पशु की वृद्धि और उत्पादकता प्रभावित होती है। पशु के बीमार होने पर उसके दूध और मांस का सेवन मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाता है।