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पशु आहार वाली नमकीन इंसानों को खिलाई तो खैर नहीं

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लिए जाने के बाद शासन हुआ गंभीर, एफएसडीए पर कसा शिकंजा, हर दिन प्रशासन को भेजनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट

बरेली। बड़ी कंपनियों की रिजेक्टेड नमकीन को पशु आहार के तौर पर नीलामी में खरीदने के बाद उसे नई पैकिंग में बाजार में उतारने के मामले का हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका कायम कराने के बाद शासन भी इस मामले में गंभीर हो गया है। शासन की ओर से सभी जिलों के प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं साथ रोजाना इस बाबत अपनी रिपोर्ट भी भेजने को कहा गया है। शासन से कड़े निर्देश आने के बाद इस मामले में आंखें मूंदे बैठे खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया है। अब बाजार और फैक्ट्रियों पर बड़े पैमाने पर छापे मारने की कार्य योजना की जा रही है।
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मुनाफाखोरों का यह खेल शहर में काफी समय से चल रहा है। हल्दीराम, बालाजी, बीकाजी, बीकानेरी और पारले जैसी नमकीन उत्पाद बनाने वाली देश की नामचीन कंपनियां गुणवत्ता की कमी की वजह से हर महीने बड़े पैमाने पर अपने ही नमकीन उत्पाद रिजेक्ट कर उसे पशु आहार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के लिए आरक्षित कर देती हैं। मुनाफाखोर इसी नमकीन को नीलामी में खरीदकर आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। रिजेक्टेड नमकीन में घटिया मसाले, मिर्च और सेहत के लिए काफी खतरनाक मानी जाने वाली टाटरी मिलाकर नई पैकिंग में मिक्सचर और नवरत्न नमकीन के नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। होली के सीजन में इस नमकीन की जमकर खपत हो रही है। गांव-देहात की दुकानों पर इसका सबसे ज्यादा स्टाक भेजा जा रहा है।
एफएसडीए तो इस घटिया नमकीन के कारोबार पर आंखें मूंदे बैठा था लेकिन अमर उजाला के 21 फरवरी के अंक में इस गोरखधंधे का खुलासा किए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने इस खबर का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम करा दी। न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और समित गोपाल ने सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार से इस मामले में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी तो लखनऊ में बैठे खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट से वक्त मांगा तो अगली सुनवाई के लिए 20 मार्च की तारीख तय कर दी गई।
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अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने विभाग के सभी मंडलीय सहायक आयुक्त और सभी जिलों के अभिहित अधिकारियों को इस संबंध में कड़ा पत्र जारी किया है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि बड़ी कंपनियों की रिजेक्टेड नमकीन को नई पैकिंग में दोबारा बाजार में उतारे जाने के मामले में थोक और फुटकर कारोबारियों पर छापे मारे जाए। घटिया नमकीन बेचे जाने का कोई भी मामला सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाए। आयुक्त ने सभी जिलों को ऐसी कार्रवाई की रोजाना मुख्यालय को रिपोर्ट भी भेजने का आदेश दिया है।

शासन ने आंखें तरेरी तो तुरंत पकड़ ली फैक्ट्री

पशु आहार वाला मिक्सचर बिकने के मामले में फर्जी रिपोर्टिंग कर गुमराह करने वाली एफएसडीए की जिला टीम की करतूत मंडलीय टीम ने की उजागर, शासन के आदेश पर छापा, पहले दिन ही एक फैक्ट्री सीज
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। एफएसडीए की जिला टीम अब तक तो इस बात से साफ इनकार कर रही थी कि बाजार में घटिया नमकीन बेची जा रही है। बुधवार को शासन से घटिया नमकीन का कारोबार बंद कराने के लिए छापे मारने का आदेश आया, तब भी जिला टीम खामोश बैठी रही। इसके बाद बृहस्पतिवार को एफएसडीए की मंडलीय टीम मैदान में उतरी। परसाखेड़ा की एक नमकीन फैक्टरी पर छापा मारा गया तो वहां बेहद गंदे माहौल में नमकीन बनती देख एफएसडीए अफसर भी चौंक गए। उन्होंने फैक्टरी को सीज कर दिया। फैक्टरी में रखा पूरा स्टाक भी जब्त कर लिया। मंडलीय टीम के बाद जिला टीम भी छापे मारने निकली।
एफएसडीए के आयुक्त की ओर से चार मार्च को ही घटिया नमकीन के कारोबार पर रोक लगाने के लिए बड़े पैमाने पर छापे मारने का आदेश बरेली के सहायक आयुक्त खाद्य और जिला अभिहित अधिकारी के दफ्तर में पहुंच गया। आदेश के मुताबिक जिला अभिहित अधिकारी की अगुवाई में ही इस आदेश का क्रियान्वयन किया जाना था लेकिन घटिया नमकीन के खिलाफ न जिला अभिहित अधिकारी खुद कहीं छापा मारने निकले न उनकी टीम की ओर से कोई कार्रवाई की गई। यह भी नजरअंदाज कर दिया गया कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और उस पर शासन का भी रुख सख्त है। जिला टीम की इस बेपरवाही के बाद बृहस्पतिवार को सहायक आयुक्त खाद्य संजय पांडेय सीएफओ वीरेंद्र द्विवेदी के साथ खुद छापा मारने निकले।
पहला छापा परसाखेड़ा में नमकीन बनाने वाली फैक्टरी पप्पू स्वीट्स एंड बिस्किट्स पर मारा गया। यहां जिस हालात के बीच नमकीन बन रही थी, उसे देखकर अफसर चौंक गए। खाने-पीने की चीजों के उत्पादन के लिए जिन मानकों का पालन किया जाना चाहिए, उनमें से एक का भी पालन नहीं हो रहा था। कई नमूने भरवाकर संजय पांडेय ने इस फैक्टरी को सीज करा दिया। मंडलीय टीम के निकलने के बाद एफएसडीए की जिला टीम भी छापा मारने निकली। फरीदपुर के गांव जेड़ में छापा मारकर क्रैक्स, नवरत्न और बीकानेरी भुजिया के नमूने भरे। शहर में सिटी सब्जी मंडी की गोल्डी स्वीट्स की दुकान से मावा और छेना के सैंपल भरे गए। सिकलापुर के महेश किराना स्टोर से पिसी मिर्च का नमूना भरा गया।
जूते-चप्पलों के बीच नंगी जमीन पर बन रही नमकीन पशुओं के लिए नहीं आपके लिए है
बरेली। परसाखेड़ा की नमकीन बनाने वाली फैक्टरी पप्पू स्वीट्स एंड बिस्किट्स में जिस हालात में नमकीन बनाकर उसकी पैकिंग की जा रही थी, उससे अंदाजा लगाना मुश्किल था कि यह इंसानों के खाने के लिए बनाई जा रही है या जानवरों के लिए। नमकीन बनाने से लेकर उसे पैक करने तक की प्रक्रिया देखकर एफएसडीए के मंडलीय अधिकारी भी हैरान रह गए। उन्होंने नमकीन और उसमें इस्तेमाल किए जा रहे मसालों के सैंपल तो लिए ही, फैक्टरी में नमकीन बनाने की पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी भी की ताकि यह साबित करने में कोई कसर न रहे कि फैक्टरी में मानकों के साथ किस हद तक मजाक किया जा रहा था।
फैक्टरी में लगी चक्की जिस मक्का का दलिया बनाया जा रहा था, उस मक्का को बगैर कोई सफाई किए नंगी जमीन पर डाल दिया गया था। पास ही में फैक्टरी के कामगारों के जूते चप्पल बिखरे पड़े थे। कामगार चक्की के बराबर में ही बैठकर खाना खा रहे थे। चक्की से निकलकर गिरने वाला आटा पूरे फर्श पर गिरकर जगह-जगह जम गया था। नमकीन की पैकिंग भी ऐसे ही गंदे माहौल में की जा रही थी। फैक्टरी में काम करने वाली महिला जमीन पर बैठकर जहां हीटर पर नमकीन पैक कर रही थी, वहां भी पास ही में चप्पलें पड़ी हुई थीं। नमकीन को पैक करके जहां रखा जा रहा था, वहां भी गंदगी फैली हुई थी। एफएसडीए की मंडलीय टीम ने फैक्टरी से दलिया मक्का, कलर और नमकीन में इस्तेमाल होने वाले नमक-मिर्च और मसालों के भी सैंपल लिए हैं। फैक्टरी में बनने वाली यह नमकीन बाजार में पप्पू चाचा की नमकीन और पोला नमकीन के नाम से बाजार में उतारी जाती है।
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