पुलिस की विवेचना में स्पष्ट हुआ कि सिपाही रावेंद्र नकटिया का निवासी है। फर्रुखाबाद निवासी रविंद्र का उपनाम टाइगर तो सिपाही मनोज का उपनाम सुल्ताना है। धर्मेंद्र का ही निवासी और रावेंद्र का सगा भाई है। ये लोग ट्रकों को बैरियर पर रुकवाकर धर्मेंद्र से उगाही कराते थे। बाद में रुपयों का बंदरबांट होता था। पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। कोर्ट में 14 गवाह और 22 साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चारों को दोषी करार दिया है।
मेरठ निवासी कल्पना आतंकियों से ले चुकी हैं लोहा
कल्पना सक्सेना वर्ष 1990 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें वर्ष 2010 में आईपीएस कैडर मिला है। वह इस समय डीआईजी रैंक की अधिकारी हैं। वह मेरठ की मूल निवासी हैं। उन्हें पिछली साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति पदक मिल चुका है। वह 1995 में सहारनपुर जिले में सीओ रामपुर व नकुर पद पर रहते हुए आतंकियों से मुठभेड़ कर चुकी हैं।