बरेली। नायब तहसीलदार दीपक कुमार ने एक मुकदमे में न्यायालय की अवधि समाप्त होने के 5 घंटे 40 मिनट बाद रात में आदेश पारित किया, इसकी पुष्टि एसडीएम आंवला विदुषी सिंह की जांच में हुई है।
रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि न्यायालय और कार्यालय की अवधि समाप्त होने के बाद रात में आदेश पारित करना दूसरे पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाना प्रतीत होता है। अमर उजाला ने नौ जुलाई के अंक में इस संबंध में खबर भी प्रकाशित की थी।
आंवला तहसील क्षेत्र के कतरोई मजरा रुखाड़ा निवासी रामऔतार के मामले में शासन स्तर से जांच के आदेश हुए थे। डीएम ने नायब तहसीलदार दीपक कुमार को आंवला तहसील से हटाकर कलक्ट्रेट से संबद्ध किया था और एसडीएम आंवला को जांच अधिकारी नामित किया था। लंबी जांच के बाद एसडीएम ने 28 जुलाई को रिपोर्ट दी।
11 पेज की रिपोर्ट में उन्होंने अपनी टिप्पणी की अंतिम लाइन में कहा है कि न्यायालय नायब तहसीलदार ने जशोदा देवी बनाम नन्नुकी वाद (टी-20141213027251) में दीपक कुमार (नायब तहसीलदार, क्षेत्र सिरौली) ने 28 जून 2025 को शाम पांच बजे तक खतौनी और बार कोड पर आदेश अंकित नहीं किया था। उसी रात 9.40 बजे के बाद इन्होंने आदेश पारित किया। न्यायालय/कार्यालय की अवधि समाप्त होने के बाद रात में आदेश पारित करना दूसरे पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाना प्रतीत होता है।
उन्होंने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वाद पत्रावली अंतिम आदेश के लिए 16 जून 2025 को सुरक्षित की गई थी। वाद पत्रावली में संलग्न खतौनी इंटरनेट से 28 जून को ही रात 8.51 बजे निकाली गई। खतौनी न तो लेखपाल से प्रमाणित है, न भूलेख कार्यालय से निकाली गई है।
यही नहीं, वाद पत्रावली पर उपलब्ध बार कोड 28 जून की रात 8.55 बजे निकाला गया। उसी दिन फाइल पर लिखा गया है कि पत्रावली आदेश के लिए प्रस्तुत... और पत्रावली वाद आवश्यक कार्रवाई के लिए दाखिल दफ्तर हो। संवाद