बरेली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मूल्यांकन घोटाले में फंसे लोक निर्माण विभाग के पांच अभियंताओं पर लगे आरोपों की जांच अंतिम दौर में है। रिपोर्ट शासन को 15 दिन में भेजने की तैयारी है।
बरेली-सितारगंज हाईवे और रिंग रोड के लिए अधिग्रहीत जमीन पर बनी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन एनएचएआई की ओर से नियुक्त निजी एजेंसी ने किया। सत्यापन लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के तत्कालीन अभियंताओं ने किया था। तत्कालीन डीएम ने जांच कराई तो इसमें हेराफेरी सामने आई और इसके बाद अभियंता, अधिग्रहण से जुड़े अधिकारी और निजी एजेंसी कार्रवाई के घेरे में आ गई। अभियंता, अधिकारी और कर्मचारी निलंबित हुए। कोर्ट के आदेश पर बहाल हुए हैं लेकिन अभी जांच जारी है। शासन के आदेश पर इन्हें चार्जशीट दी जा चुकी है। सभी ने अपना बचाव करते हुए जवाब दाखिल किए हैं। जवाब आने के बाद जांच अधिकारी मुख्य अभियंता ने खुद सवाल किए और उन पर भी जवाब मांगा, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट फाइनल नहीं हुई है। मुख्य अभियंता अजय कुमार ने बताया कि जांच अंतिम दौर में है। साक्ष्य लिए जा चुके हैं। ब्यूरो
ये हैं जांच और कार्रवाई के घेरे में
तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) नारायन सिंह, सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह अलावा अमीन शिवशंकर जांच एवं कार्रवाई के घेरे में हैं।