सवाल : सोशल मीडिया कहीं टेलीविजन को पीछे तो नहीं छोड़ रहा?
जवाब : जब टेलीविजन आया था, तब अखबारों के समक्ष चुनौती थी। सोशल मीडिया आया तो फेक न्यूज के मामले आने लगे। अखबार तेजी से बढ़े। टीवी पर भी लोगों का भरोसा बढ़ा। कोई किसी के लिए चुनौती नहीं। बड़ा प्लेटफार्म है सोशल मीडिया, पर विश्वसनीयता पर सवाल है।
सवाल : एआई के वक्त में मीडिया कैसे सुरक्षित रहेगा?
जवाब : पत्रकारिता सिर्फ खबरों का संकलन नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनाओं को पिरोना भी है। एक मशीन मानवीय संवेदनाओं को उकेरने में कभी सक्षम नहीं हो सकती। जब किसी घटना की लाइव रिपोर्टिंग होती है तो रिपोर्टर उन पहलुओं को छूता है जो समाज को झकझोरते हैं। एआई ऐसा नहीं कर सकता।