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Bareilly News: सिपाहियों से वसूली कराता था इंस्पेक्टर रामसेवक, कमरे से बरामद हुई इतनी रकम

Fri, 23 Aug 2024 10:27 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

फरीदपुर थाने के इंस्पेक्टर रामसेवक ने सात लाख रुपये रिश्वत लेकर दो स्मैक तस्करों को छोड़ दिया। इसकी शिकायत मिलने पर एसपी ने बृहस्पतिवार को थाने में छापा मारा तो बड़ा खुलासा हुआ। इंस्पेक्टर तो दीवार फांदकर भाग गया, लेकिन उसके कमरे से नौ लाख से ज्यादा रुपये बरामद हुए। 
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आरोपी इंस्पेक्टर रामसेवक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के फरीदपुर थाने का इंस्पेक्टर रामसेवक हर प्रार्थना पत्र पर सिपाहियों से वसूली करा रहा था। थाने के समानांतर इंस्पेक्टर अपना एक अलग थाना चलाता था। खनन, नशा, जुआ-सट्टा सब में इंस्पेक्टर का हिस्सा तय होता था। स्मैक तस्करों को छोड़ने के एवज में ली गई सात लाख रुपये रिश्वत से इंस्पेक्टर के काले कारनामे सामने आए। थाने के आवास में इंस्पेक्टर जिस बिस्तर पर सो रहा था, वहीं रिश्वत के सात लाख रुपये रखे मिले। 

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एसपी दक्षिणी मानुष पारीक कार्रवाई करने पहुंचे तो वह सीयूजी मोबाइल फोन समेत फरार हो गया। इंस्पेक्टर रामसेवक के खिलाफ आई शिकायत पर कार्रवाई करने जब एसपी और सीओ पहुंचे तो रामसेवक को भनक लग चुकी थी कि कुछ गड़बड़ है। वह आवास की कुंडी लगाकर फरार हो गया। 

भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले एसपी दक्षिणी की मौजूदगी में सीओ ने इंस्पेक्टर के आवास की तलाशी कराई। वीडियोग्राफी के बीच तलाशी में तख्त पर बिछे गद्दे के नीचे गुलाबी पॉलिथीन में पांच-पांच सौ के नोटों की गड्डियां बरामद हुई। कुल सात लाख रुपये मिले। एक स्लेटी रंग के ब्रीफकेस में भी 2,84,900 रुपये बरामद हुए। इंस्पेक्टर के आवास में बने कमरों पर सील लगा दी। इसकी चाबी हेड मोहर्रिर राम बहादुर की सुपुर्दगी में दी गई है।
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खास स्टाफ से कराता था वसूली 
स्मैक तस्करों से वसूली की बड़ी कमाई के लिए खास स्टाफ को इंस्पेक्टर रामसेवक ने अलग से जिम्मेदारी दी गई थी। थाने में दिनभर दलालों का जमावाड़ा लगा रहता है। सिपाही थाने में ही पंचायत लगाकर आरोपियों से वसूली कर पीड़ित को धमकाकर फैसला कराते थे। थाने में आने वाले हर प्रार्थनापत्र की जांच बीट सिपाहियों से कराई जाती थी। इससे हल्का दरोगा भी इंस्पेक्टर से नाराज रहते थे। 

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कुंठित दरोगा अपनी पीड़ा कुछ लोगों से बयां भी करते कि इंस्पेक्टर हर शिकायत पर सिपाहियों से वसूली कराता है। इंस्पेक्टर के फरार होने के बाद नगर के लोगों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्मैक तस्करों की बात करें तो कुछ समय से फरीदपुर थाना प्रभारी पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लग रहा था। पढ़ेरा, बेहरा, मोहनपुर, मोहल्ला ऊंचा, भूरे खां गौंटिया, मोहल्ला मिर्धान के कुछ लोग लगातार स्मैक तस्करी करते हैं। 

फरीदपुर पुलिस को जानकारी के बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी। सूत्रों के अनुसार जिन बीट सिपाहियों को स्मैक तस्करों से महीना वसूली की जिम्मेदारी दी जाती थी, उनकी बाकी शिकायतें और लापरवाही भी दरकिनार की जाती थी। 

इस तरह चल रही थी वसूली
चर्चा है कि इंस्पेक्टर रामसेवक के राज में कई और भी गलत धंधे चल रहे थे। रात में खनन भी पुलिस संरक्षण में होता था। बिना अनुमति खनन करने के बदले फरीदपुर इंस्पेक्टर दस हजार रुपये प्रति रात के हिसाब से रिश्वत लेता था। इस रकम में भी नीचे का स्टाफ बंटवारा करता था। फरीदपुर से गुजरने वाली जयपुर-दिल्ली वाली डबल डेकर बसों से थाने का महीना बंधा बताया जा रहा है। 

इन बसों से स्मैक, अफीम, गांजा तक की सप्लाई की जाती है। दो बार फरीदपुर पुलिस ने भी इन बसों से गांजा जाते हुए पकड़ा। नगर में कई जगह ऑनलाइन सट्टा लगता है। मोहल्ला परा समेत नगर में कुछ जगह बड़ा जुआ होता है, जिसमें बड़े जुआरी दूर दूर से जुआ खेलने आते हैं। यह भी पुलिस की जानकारी में होता है।
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आखिर कहां गई स्मैक, होगी जांच 
बताया जा रहा है कि तीनों आरोपियों को जब पकड़ा गया तो उनके पास से करीब साढ़े तीन सौ ग्राम स्मैक मिली थी। थाने तक ये स्मैक आने की भी चर्चा है पर ये कहां गई, इस बारे में पुलिस के पास भी कोई ठोस जानकारी नहीं है। अब अधिकारी विवेचना के साथ इसकी भी जांच की बात कह रहे हैं। 

अवैध वसूली का धंधा फरीदपुर थाने में कई महीनों से चल रहा है। इसमें इंस्पेक्टर सहित कई दरोगा व सिपाही शामिल बताए जा रहे हैं। थाने में तैनात कई सिपाहियों को इंस्पेक्टर ने कारखास बना रखा था। यही सिपाही इंस्पेक्टर के लिए नगर से लेकर देहात तक जाकर वसूली करते थे। तस्करों एवं दलालों के इशारों पर पहले लोगों को पकड़ने और फिर रुपया लेकर छोड़ने का खेल होता था।

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सेटिंग होने पर शांतिभंग की कार्रवाई करके ही लोगों को छोड़ दिया जाता था। अगर किसी मामले की शिकायत भी होती तो इंस्पेक्टर शांतिभंग की कार्रवाई का हवाला देकर खुद को बचा लेते थे। थाने में आए प्रार्थना पत्रों के निस्तारण का फीडबैक लिया जाए तो भी पुलिस की अवैध वसूली का पर्दाफाश हो जाएगा जिसमें तमाम सिपाही व दरोगा पर कार्रवाई होना तय है। ऐसे पुलिसकर्मियों ने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर रखे हैं। एसपी दक्षिणी ने बताया कि स्मैक थी या नहीं थी, इस बारे में साक्ष्य नहीं हैं।  
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