बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तक मामला पहुंचा तो लड़की बार-बार अपना बयान बदलती रही। पता चला कि संतान पुत्र है और जीवित है तो उसकी ममता जाग उठी। समीति के यह कहने पर कि साबित करो बच्चा तुम्हारा है, किशोरी ने कहा कि बच्चा उसी का है और वह साथ लेकर जाएगी। उसे नहीं पता था कि बच्चा बेटा है।
जेल जाने के डर से अपनाया प्रेमी ने किशोरी के गर्भवती होने की बात पता चली तो मां ने लड़के से शादी की बात की। लड़के ने बच्चे के साथ लड़की से शादी करने से इनकार कर दिया। बाद में जेल जाने की डर से वह मान गया तो नानी ने बच्चा फेंककर दोनों का निकाह करा दिया।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष दिनेश चंद्र ने कहा कि बच्चा तीन दिनों तक सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में था। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस बोली- इलाज कराने में सीडब्ल्यूसी ने की लापरवाही
बच्चे की मौत के बाद अब पुलिस ने सीडब्ल्यूसी पर इलाज कराने में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दरोगा आरके लहरी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में स्टाफ दवाओं का इंतजाम करने के लिए परिवार को बुलाने की बात कह रहा था। इसके बाद भी बच्चे के परिवार को नहीं बुलाया गया और इसी लापरवाही में उसकी मौत हुई है।
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष बोले- प्रोबेशन के तहत हुआ खर्चा
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने बताया कि विभागीय नियमों के तहत बच्चे का इलाज चल रहा था। इस दौरान उसको बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा था। डॉक्टरों से संपर्क के बारे में पूछने पर दिनेश चंद्रा ने कहा कि लगातार डॉक्टरों के संपर्क में थे और नंबर मांगने पर वह संकोच कर गए। उन्होंने कहा कि प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवाल से ही नंबर मिल पाएगा, जो डॉक्टरों के संपर्क में थीं।
नानी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा की संस्तुति के बाद पुलिस ने बच्चे को झाड़ियों में फेंकने वाली उसकी नानी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर ने बताया कि इसमें अभी और धाराएं बढ़ाई जाएंगी। बच्चे की मां नाबालिग है, इसके बाद भी उसकी शादी करा दी गई। नाबालिग के पति का मुकदमे में नाम बढ़ाने के साथ ही उस पर पॉक्सो एक्ट और बच्चे को झाड़ियों में फेंकने वाली नानी पर नाबालिग का विवाह कराने की धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
बच्चे की मां के दावे की कराई जाएगी जांच
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने बताया कि खुद को नानी बताने वाली महिला ने बच्चे के जन्म की तारीख 11 जून बताई थी, जबकि नाबालिग मां ने 12 जून बताया। दोनों के बयानों में अंतर को देखते ही बच्चे को किसी के सुपुर्द नहीं किया गया। पुलिस से किशोरी के बयानों और बच्चे की मां होने के उसके दावे की जांच करने के लिए भी कहा गया है।