बरेली। शहर में अवैध विज्ञापन पटों की भरमार है। आंधी-बारिश में बदायूं रोड पर यूनिपोल गिरने की घटना से सबक लेते हुए नगर निगम ने शहर शहर में लगी सभी विज्ञापन संरचनाओं की जांच का आदेश दिया है। नौ विज्ञापन एजेंसियों को नोटिस जारी कर सात दिनों में स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट जमा करने के निर्देश दिए हैं। विज्ञापन पटों से हादसा होने पर संबंधित एजेंसी पर जुर्मना लगाने के साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
विज्ञापन प्रभारी राजीव कुमार राठी ने बताया कि जागरण इनगेज, प्रकाश आर्ट स्टूडियो, प्रकाश संस एजेंसी, इम्पैक्ट, सैलबैल मीडिया सर्विस, एडटैक प्रिंट एंड मीडिया, क्रिएटिव एडवरटाइजर्स, एडमेकर और प्रकाश पब्लिसिटी को नोटिस जारी किए गए हैं। शहर में लगे यूनिपोल, होर्डिंग, रूफटॉप, कैंटीलीवर, सिंगल पोल और बस क्यू शेल्टर जैसी संरचनाओं की गहन जांच करानी होगी। इन एजेंसियों को किसी अधिकृत स्ट्रक्चर इंजीनियर से यह प्रमाणित कराना होगा कि संरचना तकनीकी रूप से सुरक्षित और तेज हवा का दबाव झेलने में सक्षम है।
निगम ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में प्रमाणपत्र जमा नहीं किया तो हादसा होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी। ऐसी स्थिति में नगर निगम संबंधित फर्म से नुकसान की भरपाई कराएगा। साथ ही, जिम्मेदारों पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में 65 रूफ टॉप लगे हैं। फरवरी में कराए गए सर्वे में 64 रूफ टॉप अवैध पाए गए थे। सर्वे रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई एजेंसियों ने बिना अनुमति और नियमों की अनदेखी करते हुए रूफ टॉप लगाए, जिससे नगर निगम को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। अब नगर निगम ने ऐसे सभी भवन स्वामियों से दो साल का व्यवसायिक टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है, जिनकी छतों पर अवैध रूप से विज्ञापन लगे पाए गए हैं। साथ ही, संबंधित विज्ञापन एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
रूफ टॉप स्ट्रक्चर लगाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर एजेंसियां नगर निगम को गुमराह कर रही हैं। एजेंसियां पहले से मौजूद या अधूरे भवन के नक्शों के आधार पर अनुमति ले लेती हैं। कई मामलों में छत की वास्तविक क्षमता, ऊंचाई और उपयोग की सही जानकारी नगर निगम को नहीं दी जाती। फाइलों में सब कुछ नियमों के मुताबिक दिखाया जाता है, लेकिन मौके पर हालात बिल्कुल अलग होते हैं। इस तरह परमिशन फीस, निरीक्षण शुल्क और अन्य टैक्स की चोरी की जाती है।
नियमों के अनुसार, तय क्षेत्र में ही सीमित भार के रूफटॉप लगाना चाहिए, जबकि हकीकत में एक ही छत पर कई इंस्टॉलेशन कर दिए जाते हैं। फायर और स्ट्रक्चरल सेफ्टी के नियमों की अनदेखी आम बात है। इससे न केवल इमारतों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।