फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: जल्द स्वस्थ होना है तो झाड़फूंक के फेर में न पड़ें मिर्गी रोगी

Mon, 10 Feb 2025 01:39 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। मिर्गी लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर समय पर बेहतर इलाज हो तो पीड़ित जल्द स्वस्थ हो जाता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में परिजन झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर इसे गंभीर बना लेते हैं। सामाजिक भ्रांतियां भी इस बीमारी के सटीक इलाज में अड़चन बनती है। इसलिए इलाज को पहुंच रहे 30 फीसदी रोगी ताउम्र इससे जूझते हैं। इसका इलाज सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि मिर्गी एक तरह की न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। जिसका समय पर इलाज शुरू हो तो दो से तीन वर्ष में स्वस्थ हो जाते हैं। अगर देरी हुई तो वह गंभीर हो जाती है। इसमें दिमाग असामान्य व्यवहार करता है। दौरे आना मुख्य लक्षण है। कहा कि ओपीडी में 20-25 फीसदी मरीज मिर्गी के आते हैं। इन मर्ज में आराम मिलने पर 30 फीसदी बीच में इलाज छोड़ देते हैं। मरीजों में 15 से 30 साल की उम्र के सबसे ज्यादा 65 फीसदी मरीज हैं। इलाज शुरू होने पर 70-75 फीसदी मरीज ठीक हो रहे हैं। यह बीमारी भ्रांतियों के कारण भी विकराल बन रही है। इसके लिए जागरूक भी कर रहे हैं।

दवा बीच में न छोड़ें, नियमित इलाज कराएं
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं चिकित्साधिकारी डॉ. रविश अग्रवाल ने बताया कि मिर्गी को प्रेत बाधा या ऊपरी चक्कर न माने। विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराए। इसके लिए दो से तीन वर्ष तक दवा दी जाती है। इलाज नियमित चलता रहे तो मरीज स्वस्थ हो जाता है। दवा सही समय पर लेते रहना चाहिए। दवा बीच में छोड़ने से मरीज पर रोग दोबारा हावी होने की आशंका रहती है। बताया कि निजी चिकित्सकों की ओपीडी में माह में आठ से दस संदिग्ध मरीज पहुंचते हैं। जांच में रोग की पुष्टि के बाद ही इलाज किया जाता है।
विज्ञापन


किसी भी अंग में अनियंत्रित असामान्य गतिविधि है मिर्गी
केंद्रीय स्नायु तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) का संक्रामक रोग मिर्गी है, जिसमें दिमाग की गतिविधि असामान्य हो जाती है। व्यक्ति को दौरे, असामान्य व्यवहार, संवेदनों के आवेग आ सकते हैं। कभी-कभी चेतना खो सकती है। दौरे से कुछ समय तक अनियंत्रित गतिविधि हो सकती है, जिसमें पूरा शरीर या शरीर के एक आंशिक हिस्से में असामान्य गतिविधि हो सकती है और इसके साथ बेहोशी या फिर आंतों या ब्लैडर पर नियंत्रण खत्म हो सकता है। मिर्गी से हर आयु, वर्ग और जाति के लोग प्रभावित हो सकते हैं।
विज्ञापन


मिर्गी के मरीज ध्यान दें
- आठ घंटे अच्छी की नींद लें।
- तेज रोशनी से बचें। न उधर देखें।
- अल्कोहल और धूम्रपान से बचे।
- दवा डॉक्टर की सलाह से लेते रहें।
- ब्लड प्रेशर की जांच कराएं, तनाव मुक्त रहें।

मरीज के साथ ये न करें
- मरीज को जूता-मोजा, प्याज न सुंघाएं।
- दौरा आने पर मुंह में कोई वस्तु न डालें।
- मरीज को घेरकर न खड़े हों, हवा आने दें।
- मिर्गी के मरीज वाहन कभी न चलाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें