राम बरात में शामिल युवक पिपहरी बजाता हुआ।
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पिछले साल हुआ था बवाल, इस बार सुरक्षा के लिए बनाई थी सख्त रणनीति
बरेली। पिछले साल रामबरात के दौरान पथराव और फायरिंग की घटना से पुलिस-प्रशासन के अफसर टेंशन में थे लेकिन सोमवार को रामबरात के दौरान कहीं कोई अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई। हालांकि पिछले सालों में रामबरात देर रात संपन्न होती थी जो इस बार शाम को ही संपन्न हो गई।
पिछले साल रामबरात के दौरान मुर्गे वाली गली में पथराव और बवाल हुआ था। रामबरात के पिछले हिस्से में झगड़े के बाद दो गुट दूसरे समुदाय की गलियों में भाग पड़े थे। इसके बाद दोनों तरफ से पथराव हुआ था। लड़कों ने मुर्गे वाली गली में दूसरे समुदाय के घरों पर पथराव कर दिया तो दूसरी ओर से भी पत्थरबाजी हो गई। इस बार पिछले साल जैसा कोई वाकया न हो, इसके लिए अधिकारियों ने खासा होमवर्क किया था। रविवार को खुद एडीजी मुर्गे वाली गली में पहुंचे थे और वहां के लोगों से बातचीत की थी। सड़क और छतों से पत्थर हटवाए गए थे। आगाह भी किया कि खुराफात करने वालों को फौरन जेल भेजा जाएगा।
सोमवार को रामबरात निकली तो एसएसपी शैलेश पांडेय समेत कई और अफसर भी साथ रहे। दोपहर डेढ़ बजे करीब मलूकपुर और चाहबाई से आने वाले जुलूस कुतुबखाना पहुंचे। यहां से साझा जुलूस कोतवाली होकर निकला तो एसएसपी ने हुरियारों का स्वागत किया। उनसे गले मिले और हाथ मिलाया। शाम पांच बजे ही रामबरात समाप्त हो गई। पिछले साल के मुकाबले इस बार भीड़ भी कम रही।