बदहाल है खेल मैदान, कबाड़ बन गए हैं खेल उपकरण, नहीं होती हैं प्रतियोगिताएं
कोच के बिना अभ्यास भी नहीं कर पा रहे हैं खिलाड़ी
बरेली। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने का खास योगदान रहता है। यही वजह है कि स्कूल और कॉलेजों में शैक्षिक गतिविधियों के साथ ही खेलकूद पर विशेष जोर दिया जाता है। खेलों की इसी महत्ता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने खेलेगा इंडिया... तभी तो बढ़ेगा इंडिया का नारा दिया। इस सबके बावजूद जिले में कई कॉलेज ऐसे हैं, जहां खेलों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता हैं।
इन्हीं में से एक बरेली कॉलेज भी है। यहां खेल संसाधनों से लेकर खेल मैदान, बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस कोर्ट, जिम आदि बेहद खराब दौर से गुजर रहें हैं। एक समय में जहां बरेली कॉलेज की महिला हॉकी खिलाड़ी जिले की टीम का प्रतिनिधित्व करती थीं, वहीं अब कॉलेज के पास हॉकी टीम बनाने लायक भी खिलाड़ी नहीं हैं। दरअसल खेल के प्रति कॉलेज के खराब रवैया और संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी खुद ही खेलों से दूरी बनाने लगे हैं। कॉलेज में मैदान भी खेलने योग्य नहीं है। हॉकी और फुटबॉल के लिए गोल कोर्ट में नेट भी नहीं है।
एक दशक से नहीं हुई कोई प्रतियोगिता
विश्वविद्यालय और अंतर कॉलेज स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विद्यार्थी काफी उत्साहित रहते हैं, लेकिन बरेली कॉलेज में एक दशक से कोई प्रतियोगिता नहीं हुई है। कॉलेज के खेल इंचार्ज राजेंद्र सिह ने बताया कि कॉलेज में बड़े स्तर पर काफी समय से कोई प्रतियोगिता नहीं हुई है और न ही यहां के खिलाड़ियों ने बाहर जाकर किसी प्रतियोगिता में भाग लिया है। काफी पहले एक-दो अंतर कॉलेज प्रतियोगिताएं हुईं थीं। इनमें स्टेडियम की भागेदारी भी रही। उन्होंने बताया की विश्वविद्यालय की तरफ से भी प्रतियोगिताओं की कोई तारीख तक नहीं दी गई है।
बॉक्सिंग रिंग और मशीनें खराब
कॉलेज प्रशासन की लापरवाही की वजह से कॉलेज में लाखों रुपये की लागत से बनी बाक्सिंग रिंग और जिम में लगीं मशीनों की स्थिति दयनीय हो गई है। हमेशा हॉल में ताला लटका रहता है। बीएड के छात्र सौरभ ने बताया कि उन्होंने कॉलेज प्रशासन को काफी बार पत्र लिखकर किसी तरह जिम खुलवाया, लेकिन मशीनें पूरी तरह से खराब हैं। उनका प्रयोग करना मुश्किल है।
विद्यार्थी बोले-
खेल सामग्री नहीं मिल पाती है। खेलने के लिए अपना टेनिस रैकेट लाना पड़ता है। कई बार कॉलेज को टेबल टेनिस कोर्ट हॉल खोलने के लिए पत्र लिखा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - राहुल, बीकॉम के छात्र
बैडमिंटन कोर्ट की हालत पूरी तरह से खराब हो गई है। मैं कई बार खेलते वक्त गिर चुकी हूं। इस समस्या को कॉलेज प्रबंधन को बताया है, लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ है। - मून, बीए की छात्रा
खेल संसाधनों के नाम पर एक फुटबॉल, एक वॉलीबॉल और कुछ अन्य सामग्री ही उपलब्ध है। कॉलेज में किसी भी खेल मैदान की हालत ठीक नहीं है। न ही किसी खेल का कोच है। - शिवम, एमए फाइनल
कोरोना के कारण काफी कुछ खराब हुआ है, लेकिन जल्द ही कॉलेज में बैठक कर खिलाड़ियों को होने वाली समस्याओं का हल निकाला जाएगा। जिम की मशीनों को भी ठीक कराया जाएगा। प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। - राजेंद्र सिंह, इंचार्ज
खेल विभाग