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खुद हाथ से बनाने वालों को 320 रुपये में पड़ रहा देसी घी फिर बाजार में 228 में कैसे

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रोटी और घी - फोटो : सोशल मीडिया
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एफएसडीए ने घी कारोबारियों को किया चिन्हित, पैकिंग में हेराफेरी के मामले में भी सख्त हुआ विभाग

बरेली। पहले धौलपुर और फिर कासगंज से आए ‘देसी घी’ के रेट ने सबको चौंका दिया है। सवाल उठ रहा है कि बाहर से जब यह घी तकरीबन आधी कीमत में आ रहा है तो ग्राहकों से दुगने दाम क्यों वसूल किए जा रहे हैं। अफसर भी यह मान रहे हैं कि बाहर से आने वाले और शहर में बिकने वाले इस घी की कीमतों में इतना फर्क होने के दो ही कारण हो सकते हैं। एक तो टैक्स बचाने के लिए बिलों में गड़बड़ी हो सकती है और दूसरे मुनाफाखोरी के लिए घी में भारी मिलावट की जा सकती है। अफसर लैब की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच शहर की घी मंडी में भारी बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
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शहर के बाजार में देसी घी के तमाम ब्रांड मौजूद हैं। खुले घी का भी बड़े पैमाने पर कारोबार हो रहा है। आम तौर पर डेयरी चलाने वालों के अलावा हलवाई, दूध वाले और क्रीम बनाने वाले कारोबारी भी विभिन्न दुग्ध उत्पादों के साथ घी भी बेच रहे हैं। इन सबका मानना है कि जिस कीमत में धौलपुर और कासगंज से देसी घी आना बताया जा रहा है, उसमें यह घी बनना ही संभव नहीं है। खुद एफएसडीए के अधिकारी भी धौलपुर से आए ‘देसी घी’ की कीमत और गुणवत्ता पर भ्रमित हैं। अफसरों का कहना है कि 228 रुपये में एक किलो देसी घी मिलना नामुमकिन है। तमाम उत्पादकों और कारोबारियों का फीडबैक भी यही है कि इस रेट पर तो देसी घी बनाया ही नहीं जा सकता। वाणिज्य कर विभाग अफसरों ने भी बिलिंग में हेराफेरी की आशंका की वजह से धौलपुर की फर्म की बिलिंग की छानबीन शुरू करा दी है। एफएसडीए की ओर से भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने का भी इंतजार किया जा रहा है ताकि साफ हो सके कि मामला घी में मिलावट का है या फिर अ़ंर बिलिंग का।

बरेली की घी मंडी से आसपास के कई शहरों में होती है सप्लाई

शहर की घी मंडी और खाद्य तेल कारोबार काफी आगे है। यहां से पूरे मंडल ही नहीं बल्कि कई दूसरे शहरों और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी देसी घी और तेल की सप्लाई होती है। शहर की इन दोनों मंडियों में हर रोज करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। पिछले दिनों धौलपुर से बरेली मंडी में आए घी के बिल एफएसडीए विभाग ने चेक किए तो पता कि उसमें देसी घी कीमत 228 रुपये किलो दर्शायी गई थी। इससे विभाग सतर्क हो गया और मामला वाणिज्य कर तक पहुंचा। एफएसडीए अधिकारी बिल में देसी घी की कीमत देखकर हैरान थे कि कीमत 228 रुपये थी। जिला अभिहित अधिकारी डीआर मिश्रा समझ ही पा रहे थे कि बिल में कीमत सही है या नहीं। वाणिज्य कर विभाग से बिल सही होने की पुष्टि होने के बाद मिश्रा ने आलमगीरी गंज मंडी में छापा लगवा कर फिर से बिना लेबल और मार्का का स्टाक पकड़ लिया। अब तक बरेली की दो फर्मों के परिसर में 235 टिन देसी घी स्टाक सीज कर दिया है।

एफएसडीए के बाद वाणिज्य कर विभाग की घेराबंदी से मंडी में मचा हड़कंप

शुद्ध देसी घी खरीदना आम लोगों के लिए समस्या है। लोग शुद्धता की गारंटी पर अपेक्षाकृत ज्यादा कीमत भी चुकाने को तैयार रहते हैं। कुछ कारोबारी लोगों की यही कमजोरी भांपकर मंडी में अलग-अलग नामों से बड़े पैमाने पर मिलावटी देसी घी की आपूर्ति कर रहे हैं। एफएसडीए के सूत्रों के मुताबिक जिले भर में देसी घी का जितना उत्पादन नहीं हो रहा, उससे कहीं ज्यादा बिक्री हो रही है। बाजार में अंडर बिलिंग भी हो रही है लेकिन फिर भी यह धंधा वाणिज्य कर विभाग की कार्रवाई से बचा हुआ है। हालांकि पिछले दिनों राजस्थान से 228 रुपये के रेट में देसी घी की सप्लाई का मामला सामने आने के बाद यह विभाग अब सक्रिय हुआ है। एफएसडीए के अफसरों ने बताया कि धौलपुर से आए घी का बिल देखकर कारोबारी चिह्नित किए जा रहे हैं और इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है। सोमवार शाम आलमगीरी गंज में एक और फर्म का स्टाक सीज किया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

वाणिज्य कर की घेराबंदी से घी मंडी में हड़कंप

एफएसडीए और वाणिज्य कर विभाग का शिकंजा कसने के बाद शहर की घी मंडी में अफरातफरी का माहौल है। दरअसल शहर की घी मंडी में आसपास इलाकों से काफी घी आता है। सूत्रों के मुताबिक तमाम कारोबारी ज्यादा मुनाफे के लिए इस घी को मिलावट करने के बाद ग्राहकों को बेचते हैं। एफएसडीए की छापेमारी से घी मंडी में हड़कंप मचा हुआ है।

एसपी ट्रैफिक की सूचना पर एफएसडीए की जिला टीम ने काम किया है। धौलपुर की फर्म ने देसी घी का बिल में 228 रुपये किलो का रेट दिखाया है। कासगंज की फर्म ने भी बरेली में देसी घी करीब 315 रुपये किलो के रेट में बेचा है। ये दोनों भाव देसी घी बाजार में संदेह की वजह हैं। बरेली में यह मामला सामने आने के बाद पूरे पूरे मंडल में छापे मारने के निर्देश दिए हैं। सप्लाई करने वाली फर्मों पर कार्रवाई कराएंगे और खरीदारों के गोदाम भी चेक होंगे। - संजय पांडे, सहायक आयुक्त एफएसडीए

एक किलो देसी घी बनाने में चार सौ रुपये किलो से कम लागत नहीं आ रही है। ग्रामीण इलाकों में इसकी लागत कुछ कम हो सकती है। राजस्थान के धौलपुर से 228 रुपये किलो और कासगंज से आए घी का रेट सवा तीन सौ रुपये किलो बताया जा रहा है। इसमें गड़बड़ी और ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी साफ दिख रही है। - पंकज माहेश्वरी, हलवाई

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जो दूध नहीं बिक पाता है, उससे हम घी या मावा बना लेते हैं। गांवों में 40 रुपये किलो तक दूध मिल जाता है। अपनी मेहनत से घरों में घी बनाने पर लागत करीब 320 से चार सौ रुपये किलोे तक आती है जिसे हम लोग साढ़े चार सौ रुपये किलो तक के रेट में बेचते हैं। घी बनाने में कोई खास मुनाफा नहीं होता लेकिन नुकसान बच जाता है। - अमरपाल, दूधिया

घी की महक पर गए तो हो जाएंगे बीमार

जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक नकली घी के सेवन से यूरिन, लिवर और आंत के रोग हो सकते हैं। कैंसर होने की भी आशंका बढ़ सकती है। इसके अलावा ऐसे घी का असर दिल, कोलस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकता है। नकली घी बनाने में पाम ऑयल और केमिकल प्रयोग किए जाते हैं। खुशबू के लिए भी केमिकल मिलाए जाते हैं जिन्हें खाने से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। बाजार के उत्पादों पर भरोसा करना मुश्किल है। संभव हो तो घर पर घी बनाएं या ब्रांडेड ही खरीदें। सस्ता और खुला घी खाने से बचें।
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