बरेली। डीडीपुरम इलाके में बने मकान का कर कम करने के लिए अवधधाम कॉलोनी फेज-टू में उसकी लोकेशन दिखाकर खेल किया गया। पार्षद की शिकायत पर हुई प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी किया गया है। नगर निगम के तत्कालीन कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई।
कुछ खास लोगों को राहत और छोटे करदाताओं को आहत करने के आरोप के साथ पार्षद राजेश अग्रवाल ने सदन में दो मामले उठाए थे। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने अभिलेख खंगाला तो गड़बड़ी सामने आ गई। डीडीपुरम वार्ड के मॉडल टाउन इलाके में 12 से 20 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे बने मकान का टैक्स कम करने के लिए उसकी लोकेशन अवधधाम कॉलोनी फेज-टू की डाली गई। दिखाया गया कि मकान के सामने की सड़क 12 मीटर से कम चौड़ी है। करदाता पहले 95,147 रुपये सालाना टैक्स दे रहा था। जीआईएस सर्वे में लोकेशन बदलकर इसे घटाकर 42,107 रुपये सालाना कर दिया गया।
शिकायत के बाद हुई जांच के बाद उसका कर 1,77,024 रुपये सालाना बना। इसे जमा करने के लिए बिल भेजा गया और गलत लोकेशन भरने के लिए जीआईएस सर्वे करने वाली कंपनी के कर्मचारी पर जिम्मेदारी डाल दी गई।
इधर, पार्षद का कहना है कि नगर निगम का भी कोई न कोई अधिकारी या कर्मचारी इस खेल में शामिल है। हालांकि, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने इससे इन्कार किया है।
दूसरा मामला पटेल चौक के निकट स्थित एक स्वीट हाउस के भवन का है। टैक्स कम करने के लिए भवन के कुछ हिस्से निर्माणाधीन दर्शाए गए थे। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी का कहना है कि यह उनके कार्यकाल से पहले का मामला है, लेकिन इसमें कुछ गलत नहीं हुआ है।
संबंधित भवन स्वामी ने जुलाई 2025 में निर्माणाधीन हिस्सों पर कर आरोपित करने पर आपत्ति जताई थी। इस पर दोबारा स्थलीय सर्वेक्षण कर वार्षिक मूल्यांकन बढ़ाया गया। कर की राशि 6,03,798 से बढ़कर 6,53,924 हो गई है और टैक्स जमा भी हो गया है। ब्यूरो